20वीं सदी का वो ऐतिहासिक भाषण जिसे सुन हजारों भारतीय खुशी से रोने-नाचने लगे थे!

0
367
20वीं सदी का वो ऐतिहासिक भाषण जिसे सुन हजारों भारतीय खुशी से रोने-नाचने लगे थे!

1947, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लाखों लोग जमा थे. मूसलाधार बारिश हो रही थी और ठीक 11 बजकर 55 मिनट पर संसद के सेंट्रल हॉल में नेहरू की आवाज गूंजी. मध्यरात्रि में राष्ट्र को संबोधित करते हुए नेहरू ने कहा कि पूरी दुनिया इस भाषण की गवाह बन रही है. संसद में नेहरू ऐलान कर रहे थे- ‘आधी रात को जब पूरी दुनिया सो रही है, भारत जीवन और स्वतंत्रता की नई सुबह के साथ उठेगा.’ नेहरू के इस खास भाषण को नाम दिया गया ‘A Tryst with Destiny’. कहा जाता है कि नेहरू के इस भाषण को 20वीं सदी के सबसे जोरदार भाषणों में माना गया है. 20वीं सदी का वो ऐतिहासिक भाषण जिसे सुन हजारों भारतीय खुशी से रोने-नाचने लगे थे!

Nehruji gives his a tryst with destiny speech at Parliament in New Delhi in 1947
Pandit Nehru gives his a tryst with destiny speech at Parliament in New Delhi in 1947

पंडित जवाहर लाल नेहरू के इस ऐतिहासिक भाषण को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी सुन नहीं पाए. दरअसल, जिस वक़्त नेहरू राष्ट्र को संबोधित कर रहे थे, महात्मा गांधी बंगाल के नोआखली में अनशन पर बैठे थे. सरदार पटेल और नेहरू के बुलाने पर भी वह दिल्ली नहीं आए थे. बहरहाल, जैसे ही घड़ी में 12 बजने को था.. तभी देश में खूशियों का माहौल बनना शुरू हो गया था. लोगों शंख बजाकर नृत्य कर खुशियां जाहिर कर रहे थे.

तो वहीं दूसरी तरफ मौजूद लोगों की आंखों से आंसू बह रहे थे. वो आंसू खुशियों के थे. तभी नेहरू की ओर से भारत माता की जय के नारों से संसद का सेंट्रल हॉल गूंज उठा. संसद के बाहर इकट्ठा हुए हजारों भारतीयों की खुशी का भी ठिकाना न रहा. एक दूसरे से अंजान लोग भी एक दूसरे को खुशी से गले लगा रहे थे और आंखों से बिना इजाजत ही आंसू बहे जा रहे था.

नेहरू और डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने माउंटबेटन को दिया न्यौता

वहीं, पंडित जवाहर लाल नेहरू अपने ऐतिहासिक भाषण के बाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद के साथ माउंटबेटन से मिलने पहुंचे थे. दोनों ने माउंटबेटन को देश का पहला गर्वनर बनने का औपचारिक न्यौता दिया था. माउंटबेटन ने ये औपचारिक न्यौता स्वीकार कर लिया. जिसके बाद तीनों ने भारत की आज़ादी के नाम पोर्ट वाइन के घूंट भरे.

Pandit Nehru with other leaders giving first Independence Speech
Pandit Nehru with other leaders giving first Independence Speech

नेहरू ने माउंटबेटन को इसी मुलाकात के दौरान एक लिफाफा दिया और कहा कि इसमें कल शपथ लेने वाले मंत्रियों की लिस्ट है. इसके बाद नेहरू और राजेंद्र प्रसाद वापस लौट गए. अब माउंटबेटन ने नेहरू का दिया लिफाफा खोलकर देखा, तो उनको हंसी आई और वो हंसने लगे.  क्योंकि, लिफाफे में कुछ नहीं था, वह बिल्कूल खाली था. जल्दबाजी में नेहरू जी उसमें मंत्रियों के नाम की लिस्ट रखनी ही भूल गए थे.

भाषण के कुछ अहम् अंग

20वीं सदी का वो ऐतिहासिक भाषण जिसे सुन हजारों भारतीय खुशी से रोने-नाचने लगे थे! यूँ तो पूरी भाषण ऐतिहासिक थी, फिर भी भाषण के कुछ अहम् बिंदु जो सबसे ज्यादा चर्चा में रहा.

“जब आधी रात के घण्टे बजेंगे, जबकि सारी दुनिया सोती होगी, उस समय भारत जगकर जीवन और स्वतंत्रता प्राप्त करेगा। एक ऐसा क्षण आता है, जो कि इतिहास में कम ही आता है, जबकि हम पुराने को छोड़कर नए जीवन में पग धरते हैं, जबकि एक युग का अन्त होता है, जबकि राष्ट्र की चिर दलित आत्मा उद्धार प्राप्त करती है।

भारत की, प्राचीन, शाश्वत और हमेशा नई स्फूर्ति देने वाली, हमारी अत्यंत प्रिय मातृभूमि को श्रद्धा से नमन करते हैं और हम नए सिरे से इसकी सेवा करने का संकल्प लेते हैं। जय हिन्द !”

 

Author: Team The Rising India

Keywords: Pandit Nehru, Indian Independence, 1947 Best Speech, Mountbatten, A tryst with destiny

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here