अभिनय, जासूसी और पाकिस्तान में मौत : भारतीय जासूस ‘ब्लैक टाइगर’ की सच्ची कहानी

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अभिनय, जासूसी और पाकिस्तान में मौत : भारतीय जासूस 'ब्लैक टाइगर' की सच्ची कहानी

समय समय पर हम अपने देश के लिए मर मिटने वाले वीर सपूतों की गाथा सुनते रहते हैं. आज भी हम ऐसे ही एक देश प्रेमी व्यक्तित्व की चर्चा करेंगे. उन्होंने सीमा पार कर दुश्मनों के बीच रह कर भी भारत की सेवा की. अभिनय, जासूसी और पाकिस्तान में मौत : भारतीय जासूस ‘ब्लैक टाइगर’ की सच्ची कहानी.

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रविंद्र कौशिक एक ऐसा ही नाम है. उन्होंने आगे आने वाले खतरे को भांप कर भी अपने देश की सेवा करने के उद्देश्य से अपने प्राणों को जोखिम में डाला. रविंद्र भारतीय रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) एजेंट थे.

[अभिनय, जासूसी और पाकिस्तान में मौत : भारतीय जासूस ‘ब्लैक टाइगर’ की सच्ची कहानी][Ravindra Kaushik: Black Tiger of India]

अभिनय के माध्यम से रॉ में भर्ती 

राजस्थान के गंगा शहर में जन्मे रविंद्र कौशिक को बचपन से ही नाटक पात्रों में बड़ी रूचि थी. पढाई के दौरान समय मिलने पर वे रंगमंच अभिनय में अपना समय बिताते थे. अपनी योग्यता को राष्ट्रीय स्तर नाटक सभा लखनऊ में प्रदर्शित कर चुके हैं. आश्चर्य की बात नहीं है की उनकी इस अभिनय की कला ने भारत की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) को भी प्रभावित किया. रविंद्र की जासूसी की एक्टिंग से ही प्रभावित होकर ही रॉ ने उन्हें अपने साथ शामिल कर लिया. 

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रविंद्र ने शायद यह नहीं सोचा होगा की उनकी ज़िन्दगी की रफ़्तार इस तरह बदल जायेगी. रॉ द्वारा भारतीय जासूस बनकर देश सेवा के अवसर को रविंद्र गवाना नहीं चाहते थे. ग्रेजुएशन पूरा होते ही उन्होंने रॉ ज्वाइन कर लिया। लगभग 2 सालों की ट्रेनिंग के बाद उन्हें भारतीय खुफिया जासूस के रूप में पाकिस्तान भेज दिया गया. 

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नबी अहमद शाकिर

पाकिस्तान में अपनी पहचान बदल कर वे नबी अहमद शाकिर के नाम से रहने लगे. वहां वे वकालत की पढाई कर पाकिस्तानी सेना में शामिल हुए. रविंद्र के पाकिस्तानी सेना में भी कई प्रमोशन्स हुए. उन्होंने मेजर की उपाधि पर भी काम किया. अपने काम में निपुण रविंद्र ने पाकिस्तानी हुकूमत और सेना की अनेक महत्वपूर्ण जानकारियां भारत को दी. 

ब्लैक टाइगर

रविन्द्र कौशिक द्वारा प्रदान की गुप्त जानकारी का उपयोग कर, भारत पाकिस्तान से हमेशा एक कदम आगे रहा और कई अवसरों पर पाकिस्तान ने भारत की सीमाओं के पार युद्ध छेड़ना चाहा, लेकिन रविन्द्र कौशिक द्वारा दिए गए समय पर अग्रिम शीर्ष गुप्त जानकारी का उपयोग इसे नाकाम कर दिया गया.

1979 से 1983 तक उनहोंने जो रॉ के लिए बहुमूल्य जानकारी पर पारित की वे भारतीय रक्षा बलों के लिए बहुत मददगार थी। उन्हें भारत के तत्कालीन गृह मंत्री एसबी चव्हाण द्वारा ‘ब्लैक टाइगर’ का खिताब दिया गया था। कुछ जानकार के अनुसार तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा उपाधि प्रदत्त किया गया था।

अमानत से मोहब्बत 

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pic: scoopwoop.com

इसी दौरान उनकी मुलाकात एक पाकिस्तानी आर्मी अफसर की बेटी अमानत से हुई. इश्क़ हुआ और रविंद्र ने उनसे शादी कर ली. बाद में दोनों का एक बेटा हुआ जिसका नाम उन्होंने आरीब अहमद खान रखा. गौर करने वाली बात यह है की इनके परिवार और पत्नी को भी उनके भारतीय जासूस होने की कोई जानकारी नहीं थी. 

मौत की सजा 

रविंद्र अपने देश की सेवा में कार्यरत रहे पर होनी को कुछ और ही मंजूर था. 1983 में एक अन्य जासूस इनायत मसीह को किसी जरुरी जानकारी के सिलसिले में रविंद्र से मिलना था. उससे पहले ही इनायत मसीह पकड़ा गया. उसने पाकिस्तानी सेना के सामने रविंद्र की सारी जानकारी बता दी. फिर क्या था पाकिस्तानी अदालत द्वारा रविंद्र को मौत की सजा दे दी गयी. 

बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस सजा को उम्रकैद में बदल दिया। लगभग 16 वर्ष की लम्बी कैद में उन्हें टीबी, अस्थमा और दिल की बीमारियां होने से उनकी मृत्यु हो गयी.

रविंद्र की तरह जाने कई देश प्रेमी हमारे देश के लिए अपना बलिदान कर देते है. उनमे से अधिकतर लोगो की क़ुरबानी गुमनामी के अँधेरे में खो कर रह जाती है जिसे हम जैसे आम लोग कम ही जान पाते है. 

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Author: The Team Rising India

Keyword: Research and Analysis Wing, India, Pakistan, Black Tiger, Inayat Masih

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