काजल और भगवान शनिदेव के जुड़े यह राज नहीं जानते होंगे आप!

0
317
काजल और भगवान शनिदेव के यह राज नहीं जानते होंगे आप

[History of Kajal][Kajal kaise banta hai] लड़का हो या लड़की, बचपन में सभी अपनी आंखों को काजल से रंगा करते हैं. लेकिन, क्या आप जानते है काजल का इतिहास? काजल और भगवान शनिदेव के जुड़े यह राज नहीं जानते होंगे आप! हम में से शायद ही किसी को पता होगा कि काजल वास्तव में कहां से आता है? क्योंकि मां घर में घी का दीपक जलाकर काजल बनाया करती थी और कान के पीछे लगती थी. कवि अवशेष कुमार विमल की ये पंक्तियाँ हमें यह बताने के लिए काफी हैं कि हमारे बचपन की सबसे अनमोल यादों में से एक है माँ के हाथ से काजल लगाना.

“अंधेरे में सितारों सी चमक उठती मेरी आंखें, मेरी अम्मा मेरी आंखों में जब काजल लगाती है “

काजल का रहस्य

Black Kajal
Black Kajal

काजल और कोहल शब्द अरबी भाषा के ‘कुहल’ से लिए गए हैं. काजल को सूरमा, कोहल और कोल जैसे शब्दों से भी जाना जाता है. भारत में महिलाओं की सुन्दरता काजल के बिना अधूरी मानी जाती है. आज काजल पेंसिल के रूप में पहुंची और मेकअप बॉक्स को सजाने का काम किया. काजल के बिना ना दुल्हन या दुल्हे का शिंगार पूरा होता है और ना माँ का प्यार. एक समय था जब घी के दीये के ऊपर एक छोटा सा डिब्बा उल्टा कर काजल बनाया जाता था. यह काजल बनाने का पारंपरिक तरीका रहा है.

[Kajal kaise banta hai][History of Kajal]

शनिदेव को प्रिय था काजल 

काजल और भगवान शनिदेव के यह राज नहीं जानते होंगे आप

काजल और भगवान शनिदेव के जुड़े यह राज नहीं जानते होंगे आप! काजल के काले रंग के कारण उन्हें शनिदेव का प्रिय माना जाता है. इसलिए शनि की साढ़ेसाती पूजा के दौरान काजल पहनना अनिवार्य बताया गया है. कहा जाता है कि शनि पूजा के लिए वह काली सुरमा को जार में भरकर शनिवार के दिन सिर से पांव तक नौ बार नीचे करके मरुस्थल की मिट्टी में गाड़ देती हैं. इसके अलावा सरसों के तेल की मालिश करने और आंखों पर काला सुरमा लगाने से भी शनि दोष दूर होता है.

काजल का इतिहास

काजल भारत के पारंपरिक रीती-रिवाजों का हिस्सा सदियों से हैं. भारत में सभी हिन्दू अपने पूजा-पाठ में काजल का इस्तेमाल सदियों से करते आ रहे हैं. हालाँकि, ऐसा कहा जाता हैं कि काजल और कोहल शब्द अरबी भाषा के ‘कुहल’ से लिए गए हैं. यह सोचना भूल है कि काजल के आविष्कार के पीछे भारत है. काजल का इस्तेमाल सबसे पहले मिस्र में किया गया था.

इतिहासकारों के अनुसार काजल का आविष्कार और उपयोग मिस्र में 3100 ईसा पूर्व में शुरू हुआ था. काजल का इस्तेमाल सबसे पहले आंखों से संबंधित बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता था. डॉक्टरों ने पाया है कि अगर काजल का इस्तेमाल रोजाना किया जाए तो पिंपल्स, कैविटी और फटने जैसी समस्या नहीं होती है. तभी से काजल को रोजमर्रा के इस्तेमाल में शामिल किया जाने लगा. [Kajal kaise banta hai][History of Kajal]

काजल के अनेक फैयदे

(Pic  The Health Site )
(Pic The Health Site )

काजल का इस्तेमाल सिर्फ महिलाएं ही नहीं पुरुष और बुजुर्ग भी खूब करते थे. ऐसा माना जाता है कि जब काजल लगाया जाता है तो तेज धूप से आंखों की रक्षा होती है और चकाचौंध के दौरान आंखें साफ देख सकती हैं. कोहल सूर्य की तेज किरणों से आंखों की रक्षा कर सकता है और इसलिए आंखों के ऊपर और नीचे काजल की रेखाओं से ढका हुआ रहता है. आज इसे ‘गैलेना आई पेंट’ भी कहते हैं. मिस्र के साथ-साथ अफ्रीकी देशों की आदिवासी जनजातियों में भी काजल का प्रयोग देखा गया. उन्होंने काजल सिर्फ आंखों पर ही नहीं बल्कि माथे, नाक और शरीर के अन्य हिस्सों पर भी पहना था. [Kajal kaise banta hai][History of Kajal]

काजल है बेहद खास

मिस्र और अफ्रीका के बाद दक्षिण एशिया में काजल का प्रयोग बहुतायत में होता है. जिसमें भारत और अरब देश शामिल हैं. भारत के राज्य में काजल के कई नाम हैं. जैसे पंजाबी और उर्दू में इसे सूरमा कहते हैं. जबकि कन्माशी को मलयालम में बुलाया जाता है. कन्नड़ में कदीज़, तेलुगु में कटुका और तमिल में कान माई. भरतनाट्यम और कथकली के नर्तकों के अलावा ठुमरी-दादरा के कलाकार भी काजल से अपनी आंखों को रंगते हैं. पारंपरिक नृत्य करने वाले कलाकारों के लिए भारतीय रंगमंच में काजल लगाना लगभग अनिवार्य है. काजल से भारतीय महिलाओं का श्रृंगार भी पूर्ण माना जाता है.

माना जाता है कि इस दीपक में देवताओं की कृपा होती है. जब इस चमक के साथ काजल किया जाता है, तो न केवल हमारी आंखों की रोशनी बढ़ती है, बल्कि आंखों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है. यानी किसी भी चीज को देखने की संभावना में सकारात्मकता होती है. [Kajal kaise banta hai][History of Kajal]

काजल बनाने कि प्रथा 

भारत में, विशेष रूप से दीपावली की रात, परिवारों में काजल तैयार करने की प्रथा है. दरअसल इस दिन भगवान गणेश और लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है. उनके सामने घी के दीपक जलाए जाते हैं और फिर जो दीपक घर के बाकी हिस्सों में होते हैं उन्हें इन दीपकों की लौ से जलाया जाता है. वह यह सुनिश्चित करता है कि प्रभु के सामने रखा दीपक रात भर जलता रहे. इस दीपक की लौ से काजल बनाया जाता है और फिर परिवार के सभी सदस्यों की आंखों पर लगाया जाता है.

माना जाता है कि इस दीपक में देवताओं की कृपा होती है. जब इस चमक के साथ काजल किया जाता है, तो न केवल हमारी आंखों की रोशनी बढ़ती है, बल्कि आंखों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है. यानी किसी भी चीज को देखने की संभावना में सकारात्मकता होती है. [Kajal kaise banta hai][History of Kajal]

घर पर बना सकते है काजल

अब बात करते हैं काजल बनाने की विधि के बारे में. हमने काजल के बारे में जाना जो आमतौर पर घर पर बनाई जाती है, लेकिन इसे पाने के और भी कई तरीके हैं. कैसे बनता है काजल? काजल बनाने के लिए आप बादाम और कपूर की मदद भी ले सकते हैं. ऐसा करने के लिए कपूर को जला दें और एक प्लेट को उल्टा करके रख दें. थाली में जमा होने वाली कोई भी कालिख काजल के रूप में इस्तेमाल की जा सकती है. इसी तरह घी में भीगे बादाम को घी के दीपक से कुछ देर के लिए जलने दें.

जब यह जलना बंद हो जाए तो कालिख को हटाकर डिब्बे में रख दें. इस तरह का काजल आंखों को तरोताजा कर देता है. काजल को सबसे पहले इस तरह बनाया गया था. दूसरा तरीका है अरंडी के तेल से काजल बनाना. इसलिए अरंडी के तेल को दीपक में रखा जाता है. उस पर रुई की बाती जलाई जाती है. इसकी लौ एक प्लेट से ढकी होती है लेकिन इस तरह से कि बाहर न जाए. जब कालिख जम जाए तो उसे एक डिब्बे में भरकर रख दें. अगर काजल गाढ़ा हो तो उसमें कपूर या बादाम के तेल की कुछ बूंदें मिला लें.

[Kajal kaise banta hai][History of Kajal]

मिलावटी काजल से सावधान

हालांकि काजल अब पेंसिल के रूप में बाजार में उपलब्ध है. यह न केवल काले, बल्कि सफेद, हरे और नीले रंग में भी उपलब्ध है. लेकिन खास बात यह है कि यह आंखों को नुकसान पहुंचाने वाले केमिकल से पूरी तरह तैयार है. इन काजल पेंसिल में रासायनिक रंगों का प्रयोग किया जाता है. इसे लंबे समय तक चलने के लिए इसमें लिकर जैसे तरल पदार्थ मिलाए जाते हैं, जिससे आंखों की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं. यही कारण है कि डॉक्टर भी होममेड काजल के इस्तेमाल पर जोर देते हैं.

काजल पिछले कुछ दशकों में एक ब्रांड के रूप में उभरी है. भारतीय कॉस्मेटिक उत्पादों में काजल की मांग अन्य सभी उत्पादों की तुलना में अधिक है. पेंसिल के आकार ने सब कुछ आसान बना दिया। करीना कपूर, रानी मुखर्जी और सोनम कपूर जैसी एक्ट्रेस जमकर केमिकल काजल लगा रही हैं.

[Kajal kaise banta hai][History of Kajal]

खनिज तेल और पाउडर के मिश्रण से बना NYX जंबो आईलाइनर अत्यधिक मांग में है. चंबोर डैज़ल आई लाइनर पेंसिल शेड नंबर 101, फेस आई पेंसिल, सॉलिड ब्लैक 02 काजल पर आधारित सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाता है. चूंकि यह तेल और मोम से तैयार किया जाता है, इसलिए किसी भी प्रकार के संक्रमण का खतरा कम होता है. तरल और जेल के रूप में काजल का प्रयोग आंखों के लिए हानिकारक बताया गया है.

काजल और भगवान शनिदेव के यह राज नहीं जानते होंगे आप!काजल और भगवान शनिदेव के यह राज नहीं जानते होंगे आप! Click To Tweet

Author: Team The Rising India

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here