‘ऑपरेशन विजय कारगिल की शौर्यगाथा’ और अमेरिकी कनेक्शन कि पूरी कहानी

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‘ऑपरेशन विजय कारगिल की शौर्यगाथा’ और अमेरिकी कनेक्शन कि पूरी कहानी

आज कारगिल दिवस है, इस दिवस पर कारगिल यूद्ध में कुर्बान सभी वीर सपूतों को नमन-और श्रद्धांजलि देने का दिन है. कारगिल की जंग में भारत को मिली सफलता को आज 22 साल हो गए हैं. भारतीय सेना के शौर्य और पराक्रम का प्रतीक कारगिल विजय दिवस हर साल 26 जुलाई को मनाया जाता है. आइए जानते है ‘ऑपरेशन विजय कारगिल की शौर्यगाथा’ और अमेरिकी कनेक्शन कि पूरी कहानी.

साल 1999 में कारगिल युद्ध में देश के वीर-जवानों ने अपने सौर्य-पराकर्म से पाकिस्तान को धूल चटा दी थी. कारगिल युद्ध में भारतीय सैनिकों ने अपने अदम्य शौर्य और वीरता का परिचय देते हुए पाकिस्तान के करीब 3 हजार सैनिकों को मार गिराया था. यह आकंड़ा कोई आम आकड़ा नहीं है, यह युद्ध 18 हजार फीट की ऊंचाई पर लड़ा गया था.

दिलों में हौसलों का तूफ़ान लिए फिरता हूं, मैं हिंदुस्तान हूं, पानी से भी दिए जलाने का हुनर लिए फिरता हूं, मैं भारतीय सेना हूं

ऑपरेशन विजयकी शुरुआत

लड़ाई की शुरुआत उस समय हुई जब पाकिस्तानी सैनिकों और आतंकवादियों ने भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की. घुसपैठियों ने खुद को प्रमुख स्थानों पर तैनात किया, जिससे उन्हें संघर्ष की शुरुआत के दौरान रणनीतिक तौर पर लाभ भी मिला. स्थानीय चरवाहों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर भारतीय सेना ने घुसपैठ वाले सभी स्थानों का पता लगाया और फिर ‘ऑपरेशन विजय’ की शुरुआत की गई.

शुरुआत में बेशक अधिक ऊंचाई पर होने के कारण पाकिस्तान की सेना को फायदा मिल रहा था. लेकिन, इससे भारतीय सैनिकों का मनोबल कम नहीं हुआ. आखिर में जीत का परचम लहरा कर भारतीये होने का मतलब समझाया.

सेना ने फिर 26 जुलाई, 1999 को घोषणा करते हुए बताया कि मिशन सफलतापूर्वक पूरा हो गया है. उसी दिन के बाद से हर साल कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है. हालांकि ये युद्ध कोई आसान या छोटी युद्ध नहीं थी, भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण युद्ध था. लेकिन, भारत के लिए ये जीत काफी महंगी भी साबित हुई. आधिकारिक आंकड़े के मुताबिक भारत के 527 सैनिक शहीद हुए थे, जबकि पाकिस्तान के 357-453 सैनिक मारे गए.

पाकिस्तानी सैनिकों-आंतकवादियों ने पहाड़ों पर बनाया था ठिकाना

पाकिस्तान के सैनिकों और आतंकवादियों ने कारगिल के ऊंचे पहाड़ों पर घुसपैठ करके अपने ठिकाने बना लिए थे. लेकिन, वह ऊंचाई से उन्होंने इसका खूब फायदा भी उठाया. इससे वह निचले हिस्से में मौजूद भारतीय सैनिकों पर आराम से गोलीबारी कर पा रहे थे. पाकिस्तान ने युद्ध के दौरान दो भारतीय लड़ाकू विमानों को मार गिराया था. तब एक अन्य लड़ाकू विमान ऑपरेशन के दौरान क्रैश हो गया.

कई मुश्किलों के सामना करने के बाद भारतीय सेना ने लगातार पाकिस्तान को धूल चटाई. पूरा देश गुस्से से उबल रहा था. एक तरफ भारतीये सैनिकों पर लगातार पाकिस्तान के तरफ से निशाना बनाया जा रहा था तो वहीं दूसरी तरफ ऊंची चोटियों पर जाकर लड़ाकू विमान क्रैश करने की भी खबर थी. लेकिन बाद में खुद को फंसता देख पाकिस्तान ने अमेरिका से मदद मांगने पड़ी. अमेरिका के तरफ से कोई भी मदद नहीं मिली जिसके बाद नापाक पाकिस्तान को फिर से मुंह की खानी पड़ी.

जब पाकिस्तान ने अमेरिका से मदद की लगाई थी गुहार

‘ऑपरेशन विजय कारगिल की शौर्यगाथा’ और अमेरिकी कनेक्शन कि पूरी कहानी को पढ़ पता चलेगा कि कैसे पाकिस्कातान को अमेरिका ने ठेंगा दिखाया था. कारगिल युद्ध को लेकर पाकिस्तान के तत्कालीन पीएम नवाज शरीफ ने अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन से बात की थी. अमेरिकी राष्ट्रपति क्लिंटन ने साफ कहा कि वह ऐसा तब तक नहीं करेंगे, जब तक पाकिस्तानी सैनिकों को नियंत्रण रेखा से पीछे नहीं हटा लिया जाता. ऐसे वाक्य पाकिस्तान के लिय एक गहरी चोट से कम नहीं थी.

पाकिस्तान लगातार झुठे ईरादों के साथ भारतीय सेना पर अटैक कर रहा था. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति के कहने से पाकिस्तान ने अपने सैनिक को पीछे हटाने पर मजबूर हो गया. वहीँ भारतीय सैनिकों ने बाकी चौकियों पर हमला कर दिया और 26 जुलाई तक आखिरी चौकी को भीपाकिस्तान के कब्ज़े से वापस पाने में कामयाब रहे.

लड़ाई के बाद क्या हुआ?

कारगिल युद्ध के खत्म होने के बाद पाकिस्तान ने इसमें किसी भी तरह की भूमिका होने से इनकार कर दिया और कहा कि भारत ‘कश्मीरी स्वतंत्रता सेनानियों’ से लड़ रहा था. हालांकि युद्ध में लड़ने वाले सैनिकों को बाद में पाकिस्तान ने सम्मानित किया. इन्हें हार मिलने के बाद मेडल से नवाजा गया, जिससे पाकिस्तान का दावा दुनिया का सबसे बड़ा झूठ साबित हुआ.

वहीं भारत ने कारगिल युद्ध के बाद रक्षा क्षेत्र में बजट का बड़ा हिस्सा खर्च करने का फैसला लिया. ये लड़ाई लगातार 60 दिनों तक चलती रही. भारतीय सेना को कई नुकसानों का सामना करना पड़ा लेकिन, पाकिस्तान को उलटे मूंह वापिस भी जाना पड़ा था.

भारत ने जब रचा था इतिहास

ऑपरेशन के दौरान, भारत ने पाकिस्तान को अपने ही शब्दों में समझा दिया था कि ये भारत है. जिस पर वो नापाक हरकत के साथ आ धमके थे वो भारतीय ज़मीन है. उस ज़मीन पर भारतीय सेना ने बलिदान और शौर्य का नया अध्याय गढ़ दिया था. एक ऐसा अध्याय जो भारतीय इतिहास में सुनहरे अक्षरों में भारतीय सेना ने हमेशा-हमेशा के लिए दर्ज कर दिया. जिसको हर साल 26 जुलाई 1999 को राजधानी दिल्ली के इंडिया गेट पर राष्ट्रपति से लेकर रक्षा मंत्री तक श्रद्धांजलि देने पहुंचते हैं और अपने सैनिकों को याद करते हैं.

वीरता पुरस्कार से सम्मानित हुए जवान

कारगिल युद्ध में विजय प्राप्त करने के बाद कई जवानों को वीरता पुरस्कार से नवाज़ा गया. अठारहवीं बटालियन, द ग्रेनेडियर्स के सैनिक ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव को परमवीर चक्र से नवाजा गया. तो वहीं, प्रथम बटालियन, 11 गोरखा राइफल्स के लेफ्टीनेंट मनोज कुमार पांडे को मरणोपरांत परमवीर चक्र दिया गया. तेरहवीं बटालियन, जम्मू कश्मीर राइफल्स के कैप्टन विक्रम बत्रा  को मरणोपरांत परमवीर चक्र से नवाजा गया. जिसके बाद तेरहवीं बटालियन, जम्मू कश्मीर राइफल्स के राइफलमैन संजय कुमार को परमवीर चक्र दिया गया.

तो वहीं, वन बिहार रेजिमेंट के मरियप्पन सरवन को मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया. भारतीय वायु सेना के स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा  को मरणोपरांत वीर चक्र दिया गया. अपने साहस और बलिदान के पराक्रम से भारतीय सैनिक ने इस युद्ध को लड़ते हुए पाकिस्तान को परास्त कर अपनी मातृभूमि को अपने नाम किया. तो यह थी ‘ऑपरेशन विजय कारगिल की शौर्यगाथा’ और अमेरिकी कनेक्शन कि एक छोटी सी कहानी.

 

Author: Team The Rising India

Keywords: Kargil War, Operation Vijay Kargil, 26th July 1999, India-Pakistan War

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