भारतीय तिरंगे को डिजाइन कब, क्यूँ और किसने किया था?

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भारतीय तिरंगे को डिजाइन कब, क्यूँ और किसने किया था?

भारतीय तिरंगे को डिजाइन कब, क्यूँ और किसने किया था? आज़ाद हिंदुस्तान की आन-बान-शान और सबसे बड़े लोकतंत्र की पहचान रखने वाला हमारे राष्ट्रध्वज के डिजाइनर पिंगली वेंकैया थे. पिंगली वेंकैया का जन्म 2 अगस्त 1876 को हुआ था. आंध्र प्रदेश के एक छोटे से गांव में पैदा हुए. साधारण परिवार में लाल-पालना हुआ और देखते हीं देखते वेंकैया उस शिखर तक गए जहां हर किसी का पहुंचना आसान नहीं होता. 

19 साल की उम्र में वेंकैया आर्मी में शामिल हो गए. वेंकैया को देशसेवा करना था. 18 से 19 साल नौजवानों के बीच ये उम्र एक सपने सोचने और उसे एक गहराईयों तक ले जाने का वक्त होता है. लेकिन, वेंकैया इस छोटी सी उम्र में आर्मी में शामिल हुए और देशसेवा में लग गए. जैसे ही इस यात्रा की शुरुआत हुई, वेकैया ने कभी पिछे मुड़ कर देखा नहीं.

बापू से मुलाकात ने वेंकैया की ज़िंदगी बदल दी

वेंकैया सिर्फ 19 साल की उम्र में पिंगली ब्रिटिश आर्मी में शामिल हुए. उनकी मुलाकात दक्षिण अफ्रीका में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से हुई. जब ये मुलाकत हुई तो वेकैंया बापू से इतने प्रभावित हुए कि उनके साथ हमेशा के लिए रहने और भारत लौटने का फैसला किया. फिर तो भारत लौटकर वो स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हुए और अपना अहम योगदान दिया. तभी से उनका नाम एक सच्चे देशभक्त, महान स्वतंत्रता सेनानी के तौर पर जुड़ने लगा.

दरअसल, वेंकैया कई भाषाओं के ज्ञाता थे. उर्दू और जापानी समेत कई तरह की भाषाओं का अच्छा ज्ञान रखते थे. वह एक प्राणी विज्ञानी, कृषि विद् और शिक्षाविद् भी थे. जिन्होने अपने जिंदगी के कई पहलूओं पर काम किया जैसे, मछ्लीपटनम में कई शैक्षिक संस्थान खोले. हीरे के खनन में विशेषज्ञता हासिल थी.

राष्ट्रीय ध्वज तैयार करने का सुझाव कैसे और क्यों दिया ?

साल 1921, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सम्मेलन दौरान वेंकैया ने राष्ट्रीय ध्वज को डिजाइन करने पर बल दिया. उनके इस विचार से गांधी जी बहुत खुश हुए और उनका ये विचार गांधी जी को सम्मान पूर्वक लगा. तभी गांधी जी ने उन्हें राष्ट्रीय ध्वज का प्रारूप तैयार करने का सुझाव दिया. इस सुझाव को ध्यान में रखते हुए पिंगली वैंकया ने पांच सालों तक तीस विभिन्न देशों के राष्ट्रीय ध्वजों पर शोध किया और अंत में तिरंगे के लिए सोचना शुरू किया.

साल 1921 का ही था, जब वेंकैया ने विजयवाड़ा में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में महात्मा गांधी से दुबारा मिले. उन्हें अपने द्वारा डिज़ाइन लाल और हरे रंग का झंडा दिखाया और साथ में केसरिया और हरे रंग के झंडे को भी सामने रखा. तभी से देश में कांग्रेस पार्टी के सारे अधिवेशनों में दो रंगों वाले झंडे का प्रयोग किया जाने लगा. लेकिन, उस समय इस झंडे को कांग्रेस की ओर से अधिकारिक तौर पर स्वीकृति नहीं मिली थी.

देश के तिरंगे को कैसे किया गया तैयार ?

जालंधर के लाला हंसराज ने इसमें चर्खा जोड़ा जिसमे गांधीजी ने सफ़ेद पट्टी जोड़ने का सुझाव दिया. उसके बाद से इस चक्र को प्रगति और आम आदमी के प्रतीक के रूप में माना जाने लगा. बाद में गांधी जी के सुझाव पर वेंकैया ने शांति के प्रतीक सफेद रंग को भी राष्ट्रीय ध्वज में शामिल किया. तभी साल 1931 में कांग्रेस ने कराची के अखिल भारतीय सम्मेलन में केसरिया, सफ़ेद और हरे तीन रंगों से बने इस ध्वज को मान्यता दी.

Pingali Venkayya Statue
Pingali Venkayya Statue

जब राष्ट्रीय ध्वज को किया गया था स्वीकार !

22 जुलाई 1947 का वो दिन था जब राष्ट्रीय ध्वज को स्वीकार किया गया. भारत को आज़ादी मिलने से पहले संविधान सभा ने जून 1947 में राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता वाली समिति को भारत के राष्ट्रीय ध्वज की जिम्मेदारी दी. गौरतलब है, कि समिति के सुझाव के अनुसार चरखे की जगह ‘अशोक स्तम्भ’ के ‘धम्म चक्र’ को जगह दी गयी. जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा में 22 जुलाई 1947 को इसे भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में स्वीकार करने का प्रस्ताव रखा जिसे सर्वसम्मति से स्वीकृत किया गया.

पिंगली का निधन

4 जुलाई 1963 को जब पिंगली वेंकैया ने हमेशा-हमेशा के लिए अलविदा कह दिया. जब ये खबर सामने आई तो मानों लोग सतब्ध हो गए. देश ने एक महान कलाकर के साथ-साथ स्वतंत्रता सेनानी खोया था. पिंगली बेशक हमारे बीच से चले गए हों लेकिन, वो देश में एक ऐसा छाप छोड़ गए की न जाने कितने अर्शे तक उन्हें याद किया जाएगा. उनका तिरंगे पर किया हुआ डिजाइनिंग भारत के इतिहास के तौर पर दर्ज हो गया है जो कभी भूलाए भूल नहीं सकता. तो यह थी एक छोटी सी जानकारी हमारे ‘भारतीय तिरंगे को डिजाइन कब, क्यूँ और किसने किया था’ के बारे में.

 

Author: Team The Rising India

Keywords: Pingali Venkayya, Indian Flag Designer

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