1947, भाषण से ठीक पहले लाहौर (पाक) को याद कर क्यूँ रोने लगे थे नेहरु? सच्ची कहानी…

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1947 भाषण से ठीक पहले लाहौर को याद कर क्यूँ रोने लगे थे नेहरु

14 अगस्त 1947, वो दिन जब भारत टुकड़ों में बंट चुका था. मोहम्मद अली जिन्ना की जिद्द ने हिंदुस्तान के मुकद्दर में एक गहरा जख्म लिख दिया जिसे आज भी भूलाए नहीं भूलता. जिन्ना की अलग मुल़्क की मांग ने न सिर्फ़ राजनीतिक अस्थिरता पैदा की, बल्कि इसकी वजह से बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा. पंजाब और बंगाल ये दोनों राज्य जल रहे थे. लगातार मुल्क में आवाजे उठ रही थीं. तो वहीं लाशों की गिनती मुश्किल थी, लहू में डूबी तलवारों की प्यास बढ़ती जा रही थी और मजलूमों की चीखों की गूंज ने दिल्ली में जवाहर लाल नेहरू को हिला दिया था. 1947, भाषण से ठीक पहले लाहौर (पाक) को याद कर क्यूँ रोने लगे थे नेहरु? सच्ची कहानी पढ़ते है!

जब नेहरु को आया फ़ोन?

एक रात ऐसा भी आया, जब देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को जगने और गंभीरता से सोचने पर मजबूर कर दिया था. वो रात कोई और नहीं बल्कि 14 अगस्त 1947 थी. यानी आजादी के एक दिन पहले, उस रात नेहरू, इंदिरा गांधी, फिरोज गांधी और पद्मजा नायडू के साथ खाने की मेज पर बैठे ही थे कि फोन की एक लंबी घंटी बजी. नेहरू ने फोन उठाया और फोन पर दूसरी ओर मौजूद शख्स से बात की और फोन रख दिया. जैसे ही नेहरू ने फोन रखा उनके चेहरे का अब तक रंग उड़ चुका था. नेहरू ने अपने चेहरे को अपने हाथों से ढ़क लिया और जब चेहरे से हाथ हटाए तो उनकी आंखें आंसुओं से भर चुकी थीं. फोन लाहौर से आया था.

लाहौर में क्यों हो गई थी मार-काट?

नए मुल़्क में नए प्रशासन के आते ही लाहौर में मार-काट शुरू हो गई थी. सिख और हिंदू इलाक़ों में पानी बंद कर दिया गया था. लोग प्यास से पागल हो रहे थे. जो भी पानी के लिए घरों से निकलता, उन्हें चुन-चुनकर मारा जा रहा था. लाहौर की गलियां हिंसा की आग में झुलस रही थीं. रेलवे स्टेशन पर नंगी तलवारें लिए लोग घूम रहे थे कि वहां से भागने वाले हिंदू और सिखों को मारा जा सके. ये सब बातें जब पंडित जवाहर लाल नेहरू को पता चली, तो वो अंदर से पूरी तरह टूट गए थे.

नेहरू ने कमजोर शब्दों में कहा, ‘मैं आज देश को कैसे संबोधित कर पाऊंगा, जब मुझे पता हैं मेरा लाहौर जल रहा है.’ जब नेहरू ये सब कुछ कह रहे थे, तब इंदिरा गांधी वहीं उनकी पास खड़ी थीं, तब इंदिरा ने अपने पिता को संभालते हुए कहा कि आप भाषण के लिए खुद को मानसिक रूप से तैयार कीजिए ताकि आजाद देश को सहीं से संबोधित कर सके.

इंदिरा गाँधी की बात मानते हुए, नेहरु ने खुद को संभाला और आज़ाद भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में अब तक का सबसे बेहतरीन भाषण दिया!

 

Author: Team The Rising India

Keywords: Pandit Nehru, Lahore, Phone call from Lahore, Indira Gandhi, 1947

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