भारत रत्न पुरस्कार समारोह में अब्दुल कलाम नर्वस क्यों थे?

0
274
भारत रत्न पुरस्कार समारोह में अब्दुल कलाम नर्वस क्यों थे

‘सपने वो नहीं है जो आप नींद में देखे, सपने वो है जो आपको नींद ही नहीं आने दे’ – ये विचार है देश के महान नेता, महान वैज्ञानिक और भारत के पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्ना अब्दुल कलाम की. 27 July को अब्दुल कलाम का पुण्यतिथि मनाया जाता है. अब्दुल कलाम आज़ाद को लोग मिसाइल मैन के नाम से भी जानते हैं. फिर आखिर भारत रत्न पुरस्कार समारोह में अब्दुल कलाम नर्वस क्यों थे? आइये पढ़ते है पूरी कहानी.

भारत रत्न पुरस्कार समारोह में अब्दुल कलाम नर्वस क्यों थे? Click To Tweet

मिसाइल मैन के नाम से विख्यात आज़ाद हमेशा से उनके विचार लोगों के बीच प्रेरणादायक रहा. वो एक महान देशभक्त थे जिन्होंने कई दशकों तक निस्वार्थ भाव से अपनी मातृभूमि और मानवता की सेवा की और दुनिया भर के लोगों के लिए एक आदर्श के रुप में विख्यात हुए.

शानदार व्यक्तित्व वाले नेता थे भारत रत्ना अब्दुल कलाम

एक साधारण परिवार में जन्में अब्दुल कलाम आज़ाद देश के एक शानदार व्यक्तित्व वाले नेता, वक्ता और देशभक्त थे. उन्होंने जिस भी क्षेत्र में काम किया वो उनके मुराद हो गए. अब्दुल कलाम आज़ाद का पूरा नाम पकीर जैनुलाबदीन अब्दुल कलाम है. वे एक गैरराजनीतिक व्यक्ति रहे हैं फिर भी विज्ञान की दुनिया में चमत्कारिक प्रदर्शन के कारण इतने लोकप्रिय रहे, कि देश ने उन्हें सर्वोच्च पद पर आसीन कर दिया. लगातार अपने काम से प्रेरणा बनने वाले कलाम दुनिया में धिरे-धिरे विख्यात होते जा रहे थे.

अब्दुल कलाम के माता-पिता दोनों न तो पढ़े-लिखे थे और न ही वे अमीर थे. कलाम बचपने के दिनों से ही उन्होंने ना तो अमीरी देखी थी और ना ही ऊंच शिक्षा. लेकिन, कलाम एक साधारण परिवार से आने के बाद भी देश के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में अपना नाम दर्ज कराया. उनके विचार ऐसे थे जैसे जिंदगी में कभी भी असंतुष्टी हो ही नहीं सकती.

कलाम के माता-पिता पढ़े लिखे जरूर नहीं थे लेकिन उन्होंने कलाम के प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए पूरे जीवन भर उनका साथ दिया. उनके जिंदगी में एक स्तंभ के तरह खड़े रहे और हमेशा से उन्हें प्रेरित करते रहे. और इन अथक प्रयासों ने एक छोटे शहर के साधारण बालक को देश के सबसे बड़े वैज्ञानिकों में से एक और बाद में भारत के राष्ट्रपति में बदल दिया.

अंतरिक्ष में कैसे पंहुचे कलाम

एक वैज्ञानिक का राष्ट्रपति पद पर पहुंचना पूरे विज्ञान जगत के लिए सम्मान तथा प्रतिष्ठा की बात थी. कहते हैं कि जो व्यक्ति किसी क्षेत्र विशेष में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करता है, उसके लिए दूसरे क्षेत्रों में भी सब कुछ आसान और सहज हो जाता है. भारत रत्ना अब्दुल कलाम इस बात को चरितार्थ करते हैं, भारत को अंतरिक्ष में पहुंचाने तथा मिसाइल क्षमता प्रदान करने का श्रेय डॉ. कलाम को जाता है. उनके द्वारा सफलतापूर्वक विकसित अग्नि और पृथ्वी जैसी बैलिस्टिक मिसाइलों ने राष्ट्र की सुरक्षा को मजबूती प्रदान की है.

डॉ. कलाम अविवाहित नागरिक हैं और इनकी जीवन-गाथा किसी रोचक उपन्यास के नायक की कहानी से कम नहीं है. चमत्कारिक प्रतिभा के धनी डॉ कलाम का व्यक्तित्व इतना उन्नत है कि वह सभी धर्म, जाति एवं सम्प्रदायों के व्यक्ति नज़र आते हैं. वे एक ऐसे सर्वस्वीकार्य भारतीय हैं जो देश के सभी वर्गों के लिए ‘एक आदर्श’ बन चुके हैं. विज्ञान की दुनिया से होकर देश का प्रथम नागरिक बनना कोई कपोल-कल्पना नहीं है बल्कि यह एक जीवित प्रणेता की सत्यकथा है.

देश के लिए विज़न

भारत रत्ना अब्दुल कलाम को बच्चों और युवाओं से बातचीत करने का बहुत शौक़ था. वो युवाओं को सुनना और उन्हें सुझाव देना पसंद करते थे. भारत के भविष्य को लेकर उनके पास एक ‘विज़न’ था. वो चाहते थे कि भारत के युवा उनके इस विज़न को समझें और स्वीकारें.

Kalam loved kids

साल 1996-97 में कलाम की अध्यक्षता में विज़न 2020 डॉक्यूमेंट तैयार किया गया था. इसी के आधार पर सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी जिसमें कहा गया था कि साल 2020 तक भारत को क्या हुछ हासिल करने का लक्ष्य रखना चाहिए. इसी के आधार पर डॉक्टर कलाम ने सरकार को सलाह दी कि देश के विकास के तकनीक, विज्ञान, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक क्षेत्र में सरकार को क्या करना चाहिए और इसमें आम नागरिक को क्या भूमिका निभानी चाहिए.

इस किताब पर काम करने के लिए डॉक्टर अब्दुल कलाम और उनके सहयोगी वाईएस राजन ने दर्जनों जानकारों के इंटरव्यू किए और लाखों पन्नों के दस्तावेज़ पढ़े. ये किताब ‘इंडिया 2020: अ विज़न फ़ॉर न्यू मिलेनियम’ नाम से प्रकाशित हुई.

भारत रत्न पुरस्कार समारोह में अब्दुल कलाम नर्वस क्यों थे?

बीजेपी के तानों से तंग आ कर कि वो एक ‘कमज़ोर’ प्रधानमंत्री है, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदर कुमार गुजराल ने तय किया कि वो भारतवासियों और दुनिया वालों को बताएंगे कि वो भारतीय सुरक्षा को कितनी ज़्यादा तरजीह देते हैं. उन्होंने ‘मिसाइल मैन’ के नाम से मशहूर डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को भारत रत्न से सम्मानित करने का फ़ैसला लिया. इससे पहले 1952 में सी वी रमण के छोड़कर किसी वैज्ञानिक को इस पुरस्कार के लायक नहीं समझा गया था.

APJ Abdul Kalam receiving Bharat Ratna Award
APJ Abdul Kalam receiving Bharat Ratna Award

1 मार्च  1998 को राष्ट्पति भवन में भारत रत्न के पुरस्कार वितरण समारोह में कलाम नर्वस थे और अपनी नीली धारी की टाई को बार बार छू कर देख रहे थे. कलाम इसलिए नर्वस थे कि उन्हें उस तरह के कपड़े पहनना बिल्कुल पसंद नहीं था जिसमें वो खुद को असहज महसूस करें. भारत रत्न लेने के लिए उन्हें तैयार होकर आने के लिए कहा गया था.

अटल बिहारी वाजपेई ने जब दी बधाई !

भारत रत्न का सम्मान गृहण करने के बाद उन्हें सबसे पहले बधाई देने वालों में से एक थे अटल बिहारी वाजपेई. वाजपेई की कलाम से पहली मुलाकात अगस्त, 1980 में हुई थी जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें और प्रोफ़ेसर सतीश धवन को एसएलवी 3 के सफलतापूर्ण प्रक्षेपण के बाद प्रमुख सांसदों से मिलने के लिए बुलवाया था.

भारत रत्न का सम्मान गृहण करने के बाद किन्बहें सबसे पहले बधाई देने वालों में से एक थे अटल बिहारी वाजपेई. Click To Tweet

कलाम को जब इस आमंत्रण की भनक मिली तो वो घबरा गए और धवन से बोले, सर मेरे पास न तो सूट है और न ही जूते. मेरे पास ले दे के मेरी चेर्पू है (चप्पल के लिए तमिल शब्द ). तब सतीश धवन ने मुस्कराते हुए उनसे कहा था, ‘कलाम तुम पहले से ही सफलता का सूट पहने हुए हो. इसलिए हर हालत में वहां तुम्हे जाना होका, तभी कलाम ने इस शब्दों को संजोते हुए निकल पड़े

कलाम ऐसे क्यों चले गए

27 जुलाई 2015 की वो मनहूस शाम जब डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम भारतीय प्रबंधन संस्थान शिलोंग में ‘रहने योग्य ग्रह’ पर एक व्याख्यान दे रहे थे, तभी एक बार उन्हें जोरदार कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) हुआ. और वो बेहोश हो कर गिर पड़े. लगभग 6:30 बजे गंभीर हालत में इन्हें बेथानी अस्पताल में आईसीयू में ले जाया गया और दो घंटे के बाद इनकी मृत्यु की पुष्टि कर दी गई. जब ये खबर आई तो मानो की पूरे देस सन रह गया. मिसाइल मैन को इस तरह से देश से चले जाना किसी को भी रास नहीं आ रहा था.

 

Author: Team The Rising India

Keywords: APJ Abdul Kalam, 27 July 2015, Missile Man

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here