75वां स्वतंत्रता दिवस और शौर्य-पराक्रम की गाथाएं, जय हिन्द!

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75वां स्वतंत्रता दिवस और शौर्य-पराक्रम की गाथाएं, जय हिन्द!

इस साल हम 75वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं. 15 अगस्त 1947 को भारत अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुआ था. इसी दिन की याद में हर साल हिन्दुस्तान में 15 अगस्त का दिन स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है. यह दिन हमें महात्मा गांधी, भगत सिंह, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद समेत सैंकड़ों महान स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, तपस्या और बलिदान की याद दिलाता है. आगे पढ़ते हैं 75वां स्वतंत्रता दिवस और शौर्य-पराक्रम की गाथाएं, जय हिन्द!

हर वर्ष आजादी की सालगिरह पर स्कूलों, कॉलेजों, दफ्तरों आदि में कई कार्यक्रमों का आयोजन होता है जहां देशभक्ति के गीत गाए-बजाए जाते हैं और लोग भाषण देते हैं. इस मौके पर हम स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद कर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित कर सकते हैं. 

हजारों कुर्बानियों के बदले मिली है आज़ादी

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की दमनकारी नीतियों और भारतीय समाज के सामाजिक और आर्थिक दमनकारी नीतियों से उपजा व्यापक असंतोष. सन् 1857 में प्रथन स्वाधीनता संग्राम के रूप में सामने आया. 29 मार्च 1857 को मंगल पांडे के नेतृत्व में पूरी रेजिमेंट ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंक दिया. बिहार में कुंवर सिंह, दिल्ली में बख्त खान, कानपुर में नाना साहेब और तांत्या टोपे और झांसी में वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई ने ब्रिटिश सेना के खिलाफ युद्ध में वीरता, त्याग, बलिदान और अदम्य साहस का परिचय देते हुए उनसे लोहा लिया.

1857 के विद्रोह के बाद भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन का अंत हो गया. और 1 नवंबर 1858 की घोषणा के मुताबिक भारत में ब्रिटिश हुकूमत के शासन की घोषणा कर दी गई.

आज़ादी के पीछे शौर्य-पराक्रम की गाथाएं

19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में स्वामी विवेकानंद ने आध्यात्मिक राष्ट्रवाद को बढ़ावा देकर भारत के नव-निर्माण को नवीन स्वरूप प्रदान किया. यही वो दौर था जब बालगंगाधर तिलक और अरविंद घोष जैसे नेताओं की ओर से चलाए गए स्वदेशी आंदोलनों की वजह से आम भारतीय जनमानस राष्ट्रीयता की भावना से भर गया. ये उन्हीं के प्रयासों का नतीजा था, कि लोगों उस दौरान राष्ट्रवाद की भावना से भर गए.

स्वदेशी आंदोलनों से जुड़ते-जुड़ते लोग स्वतंत्रता आंदोलन के साथ भी जुड़े और अंग्रेज़ी हुकूमत के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद की.1906 में कलकत्ता में आयोजित कांग्रेस अधिवेशन में अध्यक्ष दादाभाई नौरोजी ने स्वराज प्राप्त करने का नारा दिया. लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्रपाल जैसे नेताओं ने स्राज आंदोलन के संघर्ष को और तेज़ कर दिया.

1919 के जलियांवाला बाग नरसंहार और रोलेट एक्ट जैसी दमनकारी नीतियों ने आग में घी का काम किया. इन घटनाओं ने देशभर के नौजवानों के दिलों में जैसे आग-फूंक दी और फिर वो हुआ जिसने स्वतंत्रता के आंदोलन को तेज़ कर दिया. देश के कोने-कोने से स्वाधीनता की आवाज़ बुलंद होने लगी. बड़ी संख्या में लोग बढ़-चढ़ कर स्वतंत्रता के अंदोलन से जुड़ने लगे. लोग बड़ी संख्या में अपनी गिरफ्तारियां देते, जेलों से छूटते और फिर दोबारा से आंदोलन पर आमादा हो जाते. देशभर में होने वाले आंदोलनों ने ब्रिटिश हुकूमत की नाक में दम कर दिया. 75वां स्वतंत्रता दिवस और शौर्य-पराक्रम की गाथाएं हमें उत्साहित करती है.

बापू का अहिंसा-असहयोग

एक ओर तो महात्मा गांधी के अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांतों और आदर्शों पर आगे बढ़ते हुए स्वतंत्रता का आंदोलन आगे बढ़ा तो वहीं दूसरी ओर 1920 में शुरू हुए असहयोग आंदोलन और 1922 के चौरी-चौरा कांड के बाद स्वाधीनता संग्राम में क्रांतिकारी आंदोलनों का भी समावेश हो गया.

भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, सुखदेव, राजगुरू, राम प्रसाद बिस्मिल, अश्फाक उल्ला खां, राजेंद्र नाथ लाहिड़ी, ठाकुर रौशन सिंह और उधम सिंह जैसे निर्भीक क्रांतिकारियों ने अपनी मातृभूमि को ब्रिटिश हुकूमत से मुक्त कराने के लिये क्रांति का रास्ता अपनाया. और अंग्रेज़ों को ईंट का जवाब पत्थर से देने की कामयाब कोशिश की. अगस्त 1942 में महात्मा गांधी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत की और भारतीय जनता को करो या मरो का नारा दिया. जिसमें लोगों ने खूब बढ़-चढ़ का भाग लिया

इस बीच नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आज़ाद हिन्द फौज का गठन किय. नेताजी का नारा था, ‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा’. इस लोकप्रिय नारे से उन्होंने देश की जनता से इस आंदोलन के साथ पूरी तरह जुड़ जाने का आमंत्रण दिया.

जब हुआ था भारत का नया उदय

दूसरा विश्व युद्ध खत्म होने के बाद, देश में अंतरिम सरकार के गठन का प्रस्ताव दिया गया. पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन हुआ. 15 अगस्त 1947 को दुनिया के मानचित्र पर भारत नाम के एक नए देश का उदय हुआ और पंडित जवाहर लाल नेहरू स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने. वर्षों के संघर्ष और अंतहीन कुर्बानियों के बाद भारत देश के नागरिकों को स्वतंत्रता हासिल हुई.

आज़ादी हमें किस कीमत पर मिली है ये हम भारतीयों से बेहतर और कौन जान सकता है. आज़ादी हासिल करने के लिये मां भारती के जाने कितने ही वीर सपूतों ने अपने प्राणों की आहूती दी, फिर कहीं जा कर हमें गुलामी के दौर से मुक्ति मिली. ये महज़ राष्ट्रीय पर्व ही नहीं है, ये श्रद्धांजलि है खून के हर उस कतरे को जिससे भारत मां के चरण-रज को पखारा गया. ये नमन है उन वीर-वीरांगनाओं को, जिनकी हर आह शब्द बन कर भारत-देश का गौरव-गान बन गए. जिसकी मधुर स्वरालिनी हर भारतवासी को गौरव से भर देती है. यह थी छोटी से लेख हमारे 75वां स्वतंत्रता दिवस और शौर्य-पराक्रम की गाथायों पर, जय हिन्द!

Author: Team The Rising India

Keywords: 75th Independence Day, Indian Freedom Fighters

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