असम-मिजोरम पुलिस के बीच खूनी झड़प ने ली अपने ही 6 जवानों कि जान, है 150 साल पूराना विवाद

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Assam-Mizoram clash took 6 soldiers life
Assam-Mizoram clash took 6 soldiers life

मंज़र ऐसा कि दो राज्यों के पुलिस और दो राज्यों के नागरिक आपस में जंग करने को तैयार बैठे है. एक ऐसा खूनी संघर्ष हुआ जिसमें उत्तर पूर्व से लेकर राजधानी दिल्ली तक अफरा-तफरी मचा गई. अब असम-मिजोरम पुलिस के बीच खूनी झड़प ने ली अपने ही 6 जवानों कि जान, है 150 साल पूराना विवाद. पढ़ते है पूरी कहानी!

क्या देश के जवानों को इसी तरीके से अपनी जान गवानी पड़ेगी? क्या सरकार इस मसले को समझाने में नकाम हो रही है? क्योंकि, जनता जब सत्ता के सिंहासन पर बैठाती है तो कई बड़े उम्मीदें जुड़ी होती है. लेकिन, ये उम्मीद कई तरह से विफल साबित होता नज़र आ रहा है. क्या ये कहना सच होगा कि इतने साल पूराने विवाद को नज़र अंदाज किया जा रहा है. या फिर जानबुझकर इसको सुलझाया नहीं जा रहा. उन जवानों के बारे में सोचिए जरा जो पिछले दिन इस विवाद में अपनी जान की बाजी लगाकर इस झड़प का हिस्सा बने.

पिछले कई दशकों से जारी असम मिजोरम सीमा विवाद चलता आ रहा है. ये सीमा विवाद मामला कोई नई नहीं है. अगर इसका रिकॉर्ड पहले से देखा जाए, तो सीमा विवाद झड़प में कई बार लोगों को अपनी जान गवांनी पड़ी. इन दोनो सिमाओं के बीच पिछले साल अक्‍टूबर में भी विवाद हुआ था. जिसका नुकसान आम आदमी को झेलनी पड़ी थी. वहीं, साल 2020 में हुई हिंसा में कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई थी.

हिंसा के बीच कई घर और दुकानों को निशाना बनाते हुए जला दिया गया था. जरा सोचिए, जो करीब 150 साल पुराना विवाद है वो अब तक जस का तस है. इस विवाद में लगातार आम आदमी निशान बन रहा है. किसी की घर उजड़ रही है तो किसी की रोजी-रोटि पर आफत आ रहा है.

ताजा असममिजोरम हिंसा का कारण?

मिजोरम की सीमा असम के कछार और हाइलाकांडी जिलों से  लगती है. यहां जमीन को लेकर दोनों सूबों के बीच आए दिन तनातनी होती रहती है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने सोमवार को कहा कि मिजोरम-असम सीमा पर तनाव तब बढ़ गया जब मिजो किसानों से संबंधित आठ खेत की झोपड़ियों को अज्ञात बदमाशों द्वारा रविवार रात जला दिया गया.

हालिया विवाद तब गंभीर हुआ जब असम की पुलिस ने इलाका खाली कराने के लिए कुछ लोगों को खदेड़ा. असम पुलिस ने कहा कि ये लोग अतिक्रमणकारी थे. बताया जाता है कि जिन लोगों को खदेड़ा गया था वो मिजोरम से थे, इसलिए इस कार्रवाई से खटास और बढ़ गई.

सीमा के दौरे पर गई असम सरकार की टीम पर 10 जुलाई एक आईईडी बम भी फेंके जाने का मामला सामने आया जिसे मिज़ोरम अधिकारी ने मानने से इंकार कर दिया. जिसके बाद असम-मिजोरम पुलिस के बीच खूनी झड़प ने ली अपने ही 6 जवानों कि जान.

असममिजोरम विवाद का क्या है पूरा मामला ?

मिजोरम की सीमा असम की बराक घाटी से लगती है. जो दोनों देश के बॉर्डर बांग्‍लादेश से लगे हुए हैं. नॉर्थ ईस्‍ट में अक्‍सर बॉर्डर पर कई मुद्दों को लेकर तनाव की स्थिति बनी रहती है. असम का मेघालय, नागलैंड, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम के साथ सीमा विवाद है.

Assam-Mizoram clash
Assam-Mizoram clash (Pic-PTI)

मेघालय के अलावा अक्‍सर असम का कभी-कभी नागालैंड से भी विवाद होता रहता है. लेकिन, पिछले महीने मेघालय के साथ दशकों पुराने सीमा विवाद ने तुल पकड़ा था. जो कोरोना वायरस महामारी की वजह से देश में लॉकडाउन लगाया गया. तभी से असम का मेघालय और मिजोरम से विवाद शुरू हो गया. अब ये विवाद लगातार हिंसक रूप ले रहा और खूनी संघर्ष देखने को मिल रहा है.

क्या ये मामला जटिल होता जा रहा है?  

नॉर्थ ईस्‍ट में सीमा विवाद बहुत ही जटिल है. इस वजह से ही असम और मिजोरम के नागरिक अक्‍सर भिड़ते रहते हैं. असम और मिजोरम का बॉर्डर वर्तमान समय में करीब 165 किलोमीटर लंबा है. यह उस समय से मौजूद है जब मिजोरम को ‘लुशाई हिल्‍स’ के तौर पर जाना जाता था.

लुशाई हिल्‍स, असम का ही एक जिला था. साल 1875 में एक नोटिफिकेशन जारी हुआ और नोटिफिकेशन के बाद लुशाई हिल्‍स, काचर प्‍लेंस से पूरी तरह से अलग हो चुका था. इसके बाद एक नोटिफिकेशन साल 1933 में जारी हुआ. इस साल जो नोटिफिकेशन आया उसमें लुशाई हिल्‍स और मणिपुर के बीच एक सीमा को रेखांकित कर दिया गया.

विवाद का कारण?

मिजोरम के लोगों का मानना है कि सीमा को साल 1875 के नोटिफिकेशन के आधार पर रेखांकित करना था. यह नोटिफिकेशन बंगाल ईस्‍टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन एक्‍ट के तहत 1873 से तैयार किया गया था. लेकिन साल 1933 के आधार पर सीमा तय किया गया जिसका विरोध मिजोरम के नेता करते आ रहे हैं.

दूसरी तरफ उनका तर्क है कि सीमा का निर्धारण करते समय मिजोरम नागरिकों से ना पूछा गया था और ना ही सलाह मशवरा ली गई थी. जो कि एक राज्य होने के नाते उनसे भी राय लेना जरूरी था. हालांकि, मिजोरम नेताओं की मानें तो असम सरकार साल 1933 के सीमा निर्धारण को मानता है और संघर्ष की असली वजह भी यही है..

आज़ादी के बाद भी नहीं सुलझा विवाद ?

देश को आजादी मिलने के बाद भी यह सीमा विवाद सुलझ नहीं सका. साल 1986 में स्‍टेट ऑफ मिजोरम एक्‍ट को पास किया गया और साल 1987 में मिजोरम एक अलग राज्‍य बन गया. वहीँ साल 1950 में असम को भारत के राज्‍य का दर्जा मिल गया था.

इसके बाद 1960 और 1970 में इसकी सीमाओं से सटे कई नए राज्‍य बने. इसकी वजह से असम का बॉर्डर क्षेत्र कम होता गया. जिसके बाद मिजोरम के लोगों का मानना है कि असम और मिजोरम की सरकारों के बीच हुए समझौते के तहत बॉर्डर में यथास्थिति को नो मैन्‍स लैंड में बरकरार रखना चाहिए था.

दोनों पक्षों की निगरानी में, नहीं कराया गया था सर्वे

इस मामले में दिलचस्प बात ये है कि असम और मिज़ोरम के बीच सीमा विवाद को सुलझाने की कोसिस कम और बयान बाजी ज्यादा देखने को मिलती है. जबकि ये मामला बहुत पूराना है. किसी ज़मीन या सीमा पर जब कोई विवाद को निपटाने की कोशिश होती है तो सबसे पहले उसका दोनों पक्षों की निगरानी में सर्वे होता है. विवाद पुराना भले हो, लेकिन आज तक इसे सुलझाने के लिए किसी स्तर पर ज्वाइंट सर्वे कराने की कोशिश नहीं हुई है, ना ही इस दिशा में ज़्यादा कार्य किया गया.

सीमा विवाद तो पहले से रहा है, लेकिन पिछले एक साल में बॉर्डर से जुड़ी घटनाओ में इज़ाफ़ा देखने को मिला है. सीमावर्ती इलाक़े में अप्रवास (Immigration) के मामले बढ़ रहे हैं और इसलिए लोगों के बीच आपसी टकराव भी बढ़ता जा रहा है. इन टकरावों को रोकने की कोशिशों को भी प्राथमिकता मिलने की ज़रूरत है क्योंकि झड़प का मामला केंद्र सरकार तक पहुंच गया है.

वहीं, सरकार के साथ-साथ पुलिस या प्रशासन को भी ऐसे मामलों को शांत करने में अपनी भूमिका निभानी होगी. पहले विवाद का स्तर यहां तक पहुंचता ही नहीं था, अब विवादों के बड़े रूप सामने आ रहे हैं क्योंकि इन विवादों का राजनीतिकरण होने लगा है. ऐसे में राजनीतिक तौर पर भी समस्या के हल को लेकर गंभीरता दिखानी चाहिए.

क्या केंद्र सरकार इसपर लेगी संज्ञान ?

दो दिन पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पूर्वोत्तर के दौरे पर गए थे और मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में सीमा विवाद पर भी बातचीत हुई. इसके बावजूद ऐसी झड़प हुई, अब दोनों राज्यों की सरकारें एक-दूसरे पर दोषारोपण करते हुए परस्पर विरोधी दावे कर रही हैं, जिनकी सच्चचाई होने के बाद ही सामने आएगा.

जहां तक सवाल सीमा संबंधी विवाद का है, तो देश के नियम कानून और संविधान के मुताबिक तमाम मंच उपलब्ध हैं. मगर अपने-अपने दावों को दूसरे पक्ष से इस तरह मनवाने और इन कोशिशों में सशस्त्र पुलिस बलों को शामिल करने की इजाजत नहीं दी जा सकती. क्योंकि ये मामला सीमा विवाद का मामला है.

विवाद को उपयुक्त ढंग से हल करने की प्रक्रिया तो अविलंब शुरू होने के साथ साथ सोमवार को हुई झड़प की निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच भी होनी चाहिए. यह पता लगाया जाना चाहिए कि इस हिंसा के दोषी कौन हैं. जिन लोगों ने अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वाह नहीं किया है उनके खिलाफ कड़ी सजा होनी चाहिए ताकि फिर से खूनी संघर्ष ना हो और लोगों की जान इस तरीके से ना जाए. तो ये थी असम-मिजोरम पुलिस के बीच हुई खूनी झड़प कि कहानी जिसने अपने ही 6 जवानों कि जान ले ली…

 

Author: Team The Rising India

Keywords: Assam-Mizoram Clash, State of Mizoram Act, Northeast India

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