ओडिशा के बालासोर में गिरी ब्रह्मोस मिसाइल, क्या है पूरा मामला?

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Brahmos Feature Image
Brahmos Missile test failed in Odisha, experts to find reasons

जमीन, हवा, पानी या फिर समुद्र की गहराइयों से भी दुश्‍मन को निशाना बना लेनी वाली ‘ब्रह्मोस’ दुनिया कि सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है. ‘ब्रह्मोस’ का पूरी दुनिया में डंका बजता है. फिर आखिर ओडिशा के बालासोर में कैसे गिरी ब्रह्मोस मिसाइल, क्या हैपूरा मामला?

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12 July को भारत ने अपने सुपरसोनिक क्रुज मिसाइल का परीक्षण किया. परीक्षण के दौरान मिसाइल लॉन्च होते ही कुछ दूरी पर जा गिरी. इस मिसाईल का परीक्षण ओडिशा के बालासोर में किया गया था.

दरअसल, मिसाइल की मारक क्षमता 450 किलोमीटर तक थी. इसी मारकक्षमता की जांच के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल थोड़ी दूर जाने के बाद जमीन पर धाराशायी हो गया. ब्रह्मोस मिसाइल का यह परीक्षण क्यों फेल हुआ, इस बात की जांच डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन और ब्रह्मोस एयरोस्पेस को-ऑपरेशन के वैज्ञानिकों की टीम कर रही है.

गिरी ब्रह्मोस मिसाइल पे क्या कह रहे हैं जानकर

ब्रह्मोस एक बहुत ही विश्वसनीय मिसाइल रही है और परीक्षणों के दौरान बहुत ही कम विफल रही है. ओडिशा के बालासोर में गिरी ब्रह्मोस मिसाइल का क्या है पूरा मामला?

DRDO

सूत्रों के मुताबिक, पहली नज़र में ऐसा लग रहा है कि संचालक शक्ति के साथ मुद्दों के कारण मिसाइल विफल हो गई. लेकिन, सटीक कारण परीक्षण के विश्लेषण के बाद ही पता चलेगा. ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का इस्तेमाल पहले 300 किमी से कम के लक्ष्य के लिए किया जाता था. लेकिन, अब सुपरसोनिक गति के साथ लंबी दूरी पर हमला करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाएगा.

ब्रह्मोस मिसाइल क्यूँ है बेहद खास

ब्रह्मोस एक सुपरसॉनिक क्रूज़ प्रक्षेपास्त्र है. क्रूज़ प्रक्षेपास्त्र उसे कहते हैं जो कम ऊँचाई पर तेजी से उड़ान भरती है और इस तरह से रडार की आँख से बच जाती है. ब्रह्मोस की विशेषता यह है कि इसे जमीन से, हवा से, पनडुब्बी से, युद्धपोत से यानी कि लगभग कहीं से भी दागा जा सकता है.

Brahmos Missile

यही नहीं इस प्रक्षेपास्त्र को पारम्परिक प्रक्षेपक के अलावा उर्ध्वगामी यानी कि वर्टिकल प्रक्षेपक से भी दागा जा सकताहै. ब्रह्मोस के मेनुवरेबल संस्करण का हाल ही में सफल परीक्षण किया गया. जिससे इस मिसाइल की मारक क्षमता में और भी बढोत्तरी हुई है.

हवा में मार्ग बदल लक्ष्य को भेद सकती है

ब्रह्मोस हवा में ही मार्ग बदल सकती है और चलते फिरते लक्ष्य को भी भेद सकती है. दरअसल, इसको वर्टिकल या सीधे किसी भी प्रक्षेपक से दागा जा सकता है. यह मिसाइल तकनीक थलसेना, जलसेना और वायुसेना तीनों के काम आ सकती है.

यह 10 मीटर की ऊँचाई पर उड़ान भर सकती है और रडार की पकड़ में नहीं आती. रडार ही नहीं किसी भी अन्य मिसाइल पहचान प्रणाली को धोखा देने में सक्षम है. इसको मार गिराना लगभग असम्भव है.

ब्रह्मोस हवा में ही मार्ग बदल लक्ष्य को भेद सकती है. Click To Tweet

ब्रह्मोस अमरीका की टॉम हॉक से लगभग दुगनी अधिक तेजी से वार कर सकती है. इसकी प्रहार क्षमता भी टॉम हॉक से अधिक है. आम मिसाइलों के विपरित यह मिसाइल हवा को खींच कर रेमजेट तकनीक से ऊर्जा प्राप्त करती है. यह मिसाइल 1200 यूनिट ऊर्जा पैदा कर अपने लक्ष्य को तहस नहस कर सकती है.

‘आकाश’ भारत का पहला रक्षा निर्यात

‘आकाश’ जमीन से हवा में हमला करने वाला एक मिसाइल सिस्‍टम है. इस वर्ष की शुरुआत में कैबिनेट सुरक्षा समिति (सीसीएस) ने इस मिसाइल के निर्यात की मंजूरी दी थी. इस मंजूरी के बाद आकाश मिसाइल को कुछ मित्र देशों जिसमें कुछ आसियान के देश जैसे वियतनाम और फिलीपींस भी शामिल हैं. हालांकि, उन्‍हें निर्यात किया जाएगा.

Akash Missile

फिल्हाल, मित्र देशों ने सेनाओं में शामिल होने के बाद देश में बनी आकाश मिसाइल को खरीदने की इच्‍छा जताई है. जो आकाश मिसाइल निर्यात की जाएगी. वह उस सिस्‍टम से पूरी तरह से अलग है जिसे सेनाएं फिलहाल प्रयोग कर रही हैं.

आकाश मिसाइल सिस्‍टम पहला ऐसा हथियार है जो भारत में बना है और जिसे निर्यात किया जाएगा. भारत फास्‍ट पेट्रोल बोट्स, हलीकॉप्‍टर्स और दूसरे हथियारों के साथ ही अंतरराष्‍ट्रीय ग्राहकों के लिए रडार्स भी तैयार कर रहा है.

क्‍यों ‘आकाश’ है पहली पसंद

इसे डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) की तरफ से डिजाइन किया गया है. कई देशों की तरफ से ब्रह्मोस मिसाइल को खरीदने की भी इच्‍छा जताई गई है. जिसे रूस के साथ मिलकर तैयार किया गया है. लेकिन आकाश मिसाइल पहली पसंद बन गई है.

आकाश मिसाइल सिस्‍टम ‘मेक इन इंडिया’ पहल की सफलता का बड़ा उदाहरण है. माना जा रहा है, कि वियतनाम आकाश मिसाइल सिस्‍टम का पहला ग्राहक बन सकता है. इसके अलावा यूएई की तरफ से भी इसे खरीदने की इच्‍छा जताई गई है. वैज्ञानिकों की मानें तो आकाश मिसाइल की विभिन्‍नताएं इसे पसंदीदा हथियार बनाती हैं.

हर मौसम में हमला करने में सक्षम

आकाश मिसाइल हर मौसम और हर ऊंचाई पर प्रभावी तरीके से काम करती है. यह लद्दाख में ठंडी जगह पर भी दुश्‍मन को निशाना बना सकती है तो थार के रेगिस्‍तान में भी दुश्‍मन को पलभर में ढेर कर देती है. इसकी यही ख‍ासियत इसे बाकी मिसाइल सिस्‍टम से अलग बनाती है.

इस मिसाइल सिस्‍टम को बहुत ही बेसिक डिजाइन के तहत डेवलप किया गया है. इसका कमांड कंट्रोल सिस्‍टम, सॉफ्टवेयर, लॉजिस्टिक्‍स भी पूरी तरह से देश में बने हैं. इस वजह से भारत हमेशा ही मिसाइल के खरीदार की जरूरत को पूरा करने में सक्षम होगा

लद्दाख में भी मिसाइल सिस्‍टम की तैनाती

भारत और चीन के बीच पिछले आठ माह से पूर्वी लद्दाख में तनाव जारी है. लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर टकराव के बीच ही इंडियन एयरफोर्स (IAF) ने दिसंबर में आकाश एयर डिफेंस मिसाइल सिस्‍टम का टेस्‍ट किया था. भारत की तरफ से गलवान घाटी हिंसा के बाद ही आकाश एयर डिफेंस मिसाइल सिस्‍टम को तैनात कर दिया गया था.

हालांकि, आकाश,  एयर डिफेंस सिस्‍टम 40 किलोमीटर के दायरे में हवा में मौजूद किसी भी टारगेट को आसानी से ध्‍वस्‍त कर सकता है. यह मिसाइल सिस्‍टम कॉम्‍बेट एयरक्राफ्ट को कुछ ही सेकेंड्स में निशाना बना सकता है. इसमें कुछ अपग्रेडेशन हुआ है और इसके बाद यह पहाड़ों में तैनाती के योग्‍य हो गया है.

Author : The Rising India Team

Keywords : Brahmos Missile, Odisha, DRDO, Akash Missile, Indo-China Border, Pakistan, Indian Air Force

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