छोटी गलती पर हाथ काट निर्मम हत्या करने वाले निहंग की पूरी कहानी

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छोटी गलती पर हाथ काट निर्मम हत्या करने वाले निहंग की पूरी कहानी

सिंघू बॉर्डर पर हुई एक हत्या ने पुरे देश में सनसनी फैला दी है. एक तरफ किसानो का आंदोलन जो लगभग एक साल से चल रहा तो वहीँ हत्या, चोरी, दबंगई के कई मामले सामने आ रहे हैं. ऐसे में सिख समुदाय से जुड़े ‘निहंग’ समाज के कुछ लोगों द्वारा एक वक्ति की निर्मम हत्या ने पुरे आंदोलन पर एक सवाल उठा दिया है. छोटी गलती पर हाथ काट निर्मम हत्या करने वाले निहंग की पूरी कहानी.

Nihang arrested at Amritsar for killing a man at Singhu Border
Nihang arrested at Amritsar for killing a man at Singhu Border

शुक्रवार की सुबह लगभग 5 बजे, दिल्ली के सिंघू सीमा के पास एक धातु के बैरिकेड से बंधी एक कटी हुई कलाई और पैर कटे हुए एक शव मिला. इस भीषण घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर भी सामने आया. पुलिस सूत्रों के अनुसार मृतक की पहचान 35 वर्षीय दलित व्यक्ति लखबीर सिंह के रूप में हुई है, जिसका कोई आपराधिक इतिहास या राजनीतिक संबंध नहीं है.

हालाँकि इस हत्या कि जिम्मेदारी निहंग समुदाय के कुछ लोगों ने ली और गिरफ़्तारी भी गुई. हत्या का कारण यह बताया जा रहा कि लखबीर सिंह ने पवित्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब को “अपवित्र” किया जिसके लिए  पीड़ित को “दंडित” किया. आखिर कौन है ये निहंग और क्या है इनका इतिहास जानते है विस्तार से.

किसे कहते है निहंग?

निहंग सिख योद्धाओं का एक अंग है. निहंग अक्सर नीले वस्त्र, तलवार और भाले जैसे प्राचीन हथियार, और स्टील के क्वाइट्स से सजाए गए पगड़ी धारण करते हैं. निहंग का अर्थ निर्भय, बेदाग, शुद्धहोता है. कई लोग निहंग समुदाय को “दर्द या आराम से अप्रभावित”, “ध्यान, तपस्या और दान के लिए दिया” और “पूर्ण योद्धाओं” के रूप में मानते है.

Nihang Group
Nihang Group

निहंग का गठन कब हुआ था?

निहंग शब्द गुरु ग्रंथ साहिब में एक भजन में आता है, जहां यह एक निडर व्यक्ति को दर्शाता है. गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे बेटे थे फतेह सिंह. एक बार फ़तेह सिंह नीले रंग के चोल और एक डुमाला (कपड़े का टुकड़ा) के साथ नीली पगड़ी पहने हुए गुरु की उपस्थिति में शामिल हुए थे. अपने बेटे को इतना प्रतापी देखकर गुरु ने कहा कि यह खालसा के सैनिकों, निहंगों की पोशाक होगी. यह बात तब कि है जब गुरु गोबिंद सिंह जी खालसा कि स्थापना की थी.

Guru Gobind Singhji with Khalsa
Guru Gobind Singhji with Khalsa

निहंग अन्य सिख योद्धाओं से कैसे भिन्न है?

ईस्ट इंडिया कंपनी के कर्नल जेम्स स्किनर (1778-1841) के एक लेख में लिखते हैं, खालसा सिखों का एक समूह वे जो नीले रंग की पोशाक पहनते हैं जो गुरु गोबिंद सिंह युद्ध के समय पहनते थे. वहीँ दूसरा समूह अपनी पोशाक के रंग से कोई झिझक नही थी. हालांकि दोनों समूह सैनिक बंदूक और चक्रबाजी की कला में माहिर थे और क्वाइट्स का उपयोग करते थे. निहंग खालसा आचार संहिता का सख्ती से पालन करते हैं. वे किसी सांसारिक गुरु के प्रति कोई खास निष्ठा नहीं रखते हैं. भगवा कपड़ो के बजाय वे अपने मंदिरों के ऊपर एक नीला निशान साहिब (झंडा) फहराते हैं.

निहंग अप्रत्याशित घटनाओं के लिए ‘छरदी कला’ (हमेशा अधिक जोश में) और ‘तिआर बार तिआर’ (हमेशा तैयारी की स्थिति) के नारों का उपयोग करते हैं. “निहंग शारदाई या शरबती देघ (संस्कार पेय)” नामक एक लोकप्रिय पेय के शौकीन होते हैं. इसमें पिसे हुए बादाम, इलायची के बीज, खसखस, काली मिर्च, गुलाब की पंखुड़ियां और खरबूजे के बीज होते हैं.

जब इसमें भांग की थोड़ी सी मात्रा मिला दी जाती है, तो उसे सुखनिधान (आराम का खजाना) कहा जाता है. इसमें भांग की अधिक मात्रा को शहीदी देग, शहादत के संस्कार के रूप में जाना जाता था. निहंग शारदाई इस्तमाल दुश्मनों से जूझते हुए चोटिल सैनिक लिया करते थें.

निहंग: सिख की इतिहास में कितनी भूमिका है?

पहले सिख शासन (1710-15) के पतन के बाद मुगल गवर्नर सिखों को मार रहे थे. अफगान आक्रमणकारी अहमद शाह दुर्रानी (1748-65) के हमले के दौरान सिख पंथ की रक्षा करने में निहंगों की प्रमुख भूमिका थी. 1734 में जब खालसा सेना को पांच बटालियनों में विभाजित किया गया था, तब एक निहंग या अकाली बटालियन का नेतृत्व बाबा दीप सिंह शाहिद ने किया था.

निहंगों ने अमृतसर में अकाल बुंगा (जिसे अब अकाल तख्त के नाम से जाना जाता है) में सिखों के धार्मिक मामलों पर नियंत्रण कर लिया. वे स्वयं को किसी सिक्ख मुखिया के अधीन नहीं मानते थे और इस प्रकार अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखते थे. अकाल तख्त में, उन्होंने सिखों की भव्य परिषद (सरबत खालसा) का आयोजन किया और प्रस्ताव (गुरमाता) को पारित किया। 1849 में सिख साम्राज्य के पतन के बाद उनका प्रभाव समाप्त हो गया था.

कौन बनते है निहंग?

किसी भी जाति, पंथ या धर्म से जुड़ा वक्ति निहंग बन सकता है. बशर्ते कि संप्रदाय में प्रवेश करने के समय सिख परंपराओं के अनुसार उसके बाल कटे हों. “उस व्यक्ति को भी पाँच बनियाँ याद रखनी चाहिए, नित्य नित्य के लिए 1 बजे उठना चाहिए, सुबह-शाम अपनी प्रार्थना करनी चाहिए. जो कोई भी इन शर्तों को पूरा करता है, उसे अमृत संचार समारोह में एक बपतिस्मा प्राप्त सिख के रूप में दीक्षा दी जाती है. इसके बाद उसे एक नया नाम, वस्त्र और हथियार दिए जाते हैं, जैसा कि गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा की स्थापना के समय किया था. “निहंग एक निहत्थे व्यक्ति पर हमला नहीं करता है.”

यह छोटी गलती पर हाथ काट निर्मम हत्या करने वाले निहंग की पूरी कहानी. हम सब को मिल कर एक बार सोच-विचार करने की जरूरत है कि आखिर किस दिशा में जा रहे है हम.

 

Author: Team The Rising India

Keywords: Nihang, Singhu Border Lynching, Kisan Andolan

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