‘हम दो और हमारे सिर्फ दो’ पापुलेशन कंट्रोल एक्ट क्यूँ है बेहद ज़रूरी!

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UP Population Control Bill 2021 Feature Image
UP Population Control Bill 2021

सरकारी नौकरी चाहिए तो अब फैमिली प्लानिंग करनी होगी खासकर अगर आप उत्तर प्रदेश से हैं. हाल ही में इस समाचार ने काफी सुर्खियां बटोरी. हम दो और हमारे सिर्फ दो’ पापुलेशन कंट्रोल एक्ट क्यूँ है बेहद ज़रूरी जानते हैं.

भारत के सबसे ज्यादा जनसंख्या (220 million) वाले राज्य उत्तर प्रदेश में State Law Commission ने एक नया पॉप्युलेशन कंट्रोल ड्राफ्ट पारित किया. यह ड्राफ्ट प्रमुख रूप से जनसंख्या नियंत्रण को ध्यान में रखकर बनाया गया है. ध्यान देने वाली बात ये है की ये ड्राफ्ट पारित होगा की नहीं ये पब्लिक ओपिनियन के बाद डिसाइड किया जाएगा. इसके लिए १० दिनों का समय दिया गया था जो की जुलाई 19 को समाप्त हो रहा है.

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इसे  Uttar Pradesh population (Control, stabilization and Welfare) Act, 2021 कहा गया है. उत्तर प्रदेश सरकार ने ये ड्राफ्ट 11 जुलाई को अनाउंस कर दिया है. इसका मेन फोकस जनसंख्या नियंत्रण है जो की आगे आने वाले इलेक्शन का मुख्य केंद्र भी है.

क्यों लाया गया ये बिल? 

इस बिल ड्राफ्ट के अनुसार  सीमित इकोलॉजिकल और इकोनोमिकल संसाधन होने के कारण इनका उचित उपयोग जरुरी है. सभी लोगो की बुनियादी आवश्यकता जैसे की घर, खाना, साफ़ पानी, गुणवत्ता की शिक्षा, जीवनयापिका के अवसर आदि मिल सके इसके लिए ये आवश्यक है की हम इसका सही और सीमित इस्तेमाल करे. ‘हम दो और हमारे सिर्फ दो’ पापुलेशन कंट्रोल एक्ट बेहद ज़रूरी है.

इसके अलावा राज्य की बढ़ती पॉप्युलेशन को देखते हुए इस बिल ड्राफ्ट की आवश्यकता मानी गयी. वर्तमान में एक्ट ड्राफ्ट हुआ है पर अगर ये अधिनियम पारित हो गया तो यह एक्ट गजट प्रकाशन की तारीख से एक वर्ष के बाद लागू हो जाएगा.

क्या ये पहली पहल है? 

उत्तरप्रदेश इस तरह की एक्ट प्रपोज़ करने वाला पहला राज्य नहीं है. कई राज्यों में इस तरह की पॉलिसी पहले से ही लागू है जैसे की गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, ओडिशा, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश. हाल ही में एक अन्य बीजेपी रूलिंग स्टेट असम में भी ये पॉलिसी प्रस्तावित की गयी है. ये विडम्बना ही है की इन बिल के आ जाने के बाद इन राज्यों में पॉप्युलेशन का प्रतिशत कंट्रोल होने की बजाये बढ़ा ही है.

जैसे की राजस्थान में 2002 में राजस्थान सिविल सर्विस पेंशन रूल 1996 सेक्शन 53 A में पॉप्युलेशन कंट्रोल के लिए कुछ नियम पारित हुए. यह बिल सरकारी कर्मचारियों को बाधित करते है इसके बाद भी राजस्थान की पॉप्युलेशन में 21. 31% की बढ़त देखने को मिली.

क्या भारत में ये पापुलेशन कंट्रोल एक्ट कारगर है? 

भारत की वर्तमान जनसंख्या लगभग 139 Crores है जो की दुनिया की कुल जनसंख्या की लगभग 17 % है. इस तरह के एक्ट भारत में और विदेशों में भी पहले कई बार लाये जा चुके है ताकि जनसंख्या विस्फोट को नियंत्रित किया जा सके और सस्टेनेबल डेवलपमेंट और बेसिक लाइवलीहुड सुचारू रूप से चल सके. 

लगभग 45 साल पहले, यूनियन हेल्थ मिनिस्ट्री द्वारा पहला “नेशनल पॉप्युलेशन पालिसी” फ्रेम किया गया था. इनमे इसी तरह के कई प्रोग्राम्स इन्क्लुडे किये गए थे जैसे की शादी की उम्र आगे बढ़ाना, छोटे परिवारों को इन्सेन्टिव्स, महिलाओ को शिक्षित करना जैसी पहल शामिल थी. लेकिन उस दौर में भी आम जनता ने इसे लेकर कुछ ज्यादा उत्साह नई दिखाया.

अंततः समय-समय पर अलग अलग पॉप्युलेशन कण्ट्रोल पॉलिसीस लाइ गयी जैसे की “नेशनल पॉप्युलेशन पालिसी 2000”. हालाँकि ये कहना सही नहीं होगा की ये पॉलिसीस कारगर रही हैं जिसका सबसे बड़ा सबूत हमारे देश की बढ़ती आबादी है जो शायद कुछ सालो में चीन को भी पीछे छोड़ दे.

नियम में प्रमोशन्स और सजा दोनों हैं!

इस प्रपोज़्ड बिल के मुताबिक जो भी शादी शुदा सरकारी कर्मचारी इस एक्ट के नियमो का पालन करेंगे उन्हें गवर्नमेंटल इन्सेन्टिव्स दिए जाएंगे. जिसमे उनके पुरे कार्यकाल में दो अतिरिक्त प्रमोशन्स, हाउसिंग डेवलपमेंट अथॉरिटी की सहायता से हाउसिंग सब्सिडीटी का भी प्रावधान रखा जाएगा.

सरकारी नौकरी चाहिए तो अब फैमिली प्लानिंग करनी होगी खासकर अगर आप उत्तर प्रदेश से है! Click To Tweet

होम लोन्स में भी सरकार की तरफ से सहायता मिलेगी पानी, बिजली, हाउस टैक्स आदि में भी छूट मिल सकती है और इसके अलावा भी कई सुविधाएं प्रस्तावित हैं. वही इस एक्ट के लागू होने के बाद इसका अनुसरण न किये जाने वालो को सरकारी नौकरी और उनके बेनिफिट्स से निर्हित रक्खा जाएगा. जिसमे राशन कार्ड यूनिट्स की लिमिट 4 कर देना, इलेक्शन लड़ने से वर्जित रखना और इसके अल्वा भी कई प्रतिबन्ध शामिल हैं. 

सरकार की पहल 

पोप्यूलेशन कंट्रोल के ड्राफ्ट बिल के अनुसार सरकार कई और छेत्र में भी काम करेगी. इसके अनुसार गर्भ निरोधक उपायों की एक्सेसिबिलिटी बढाई जायेगी और सुरक्षित गर्भपात के लिए प्रॉपर सिस्टम लाये जाएंगे. इसके अलावा इस बिल के अनुसार नवजात शिशु और मैटरनिटी रेट को काम करने वाले उपाय भी लाए जाएंगे. इस ड्राफ्ट में महिलाओं की ग्रॉस फर्टिलिटी रेट्स को 2026 तक 2.1 और 2030 तक 1. 9 का लक्ष्य रखा गया है. 

इस बिल में पोप्यूलेशन कंट्रोल को सेकेंडरी स्कूल में एक कंपलसरी सब्जेक्ट बनाया जाएगा और इस बिल के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जनसंख्या कोष भी बनाया जाएगा.

क्यों है बहस का विषय? 

बिल अभी बस प्रस्तावित ही है और इसपर बहस जंगल की आग की तरह फैलने लगी है. “विश्व हिन्दू परिषद” ने इस बिल ड्राफ्ट पर विरोध जताया है उनका कहना है ये बिल धार्मिक समुदायों में असमानता लाएगा. वही बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार के अनुसार केवल कानून लाना ही काफी नहीं है बल्कि इसके लिए लोगो में जागरूकता और शिक्षा भी लानी चाहिए.

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मुख्य ओपोजीशन पार्टी ने भी इस पर चुटकी लेते हुए कहा की उत्तर प्रदेश सरकार लॉ और आर्डर की परिस्थितियों से जनता का ध्यान बाटने के लिए ये पैंतरे अपना रही है. पर सच तो यही है की ये अब लेटेस्ट ट्रेंडिंग न्यूज़ बन गयी है जिसपर कुछ दिन या हफ्ते और बहस चलती रहेगी. पर देखना ये है की हर बार की तरह इस बार भी ये पालिसी असफल ही होगी या उत्तरप्रदेश सरकार को असेंबली इलेक्शन में खुद को आगे करने का बेहतरीन सोर्स मिल गया. 

कांग्रेस के सलमान खुर्शीद ने कहा है कि राजनेताओं को अपने बच्चों की संख्या घोषित करनी चाहिए. उत्तर प्रदेश विधान सभा की वेबसाइट पर मौजूद आंकड़ों से पता चलता है कि यूपी विधानसभा में 50% से अधिक विधायक – जहां भाजपा के पास 403 सीटों में से 304 हैं – के दो से अधिक बच्चे हैं. बीजेपी के आधे से ज्यादा विधायकों के तीन या इससे ज्यादा बच्चे हैं.

Author : The Rising India Team

Keywords : UP Population Control Act 2021, State Law Commission, Hum do Hamare Sirf Do, Yogi Adityanath, VHP

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