जाने किस चीज़ में भारत को पछाड़ पाकिस्तान और नेपाल निकला आगे, शर्म की बात!

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भारत को पछाड़ पाकिस्तान और नेपाल निकला आगे, शर्म की बात!

एक तरफ तो हमारे देश के पूंजीपति अपना नाम दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शुमार कर रहे हैं. दूसरी तरफ हमारे देश की स्थिति भुखमरी की गणना में साल दर साल दयनीय होती जा रही है. जाने किस चीज़ में भारत को पछाड़ पाकिस्तान और नेपाल निकला आगे, शर्म की बात!

आप को बता दे की हर साल ‘ग्लोबल हंगर इंडेक्स’ नाम की वेबसाइट द्वारा विश्व स्तर पर, देश के आधार पर भुखमरी की रिपोर्ट साँझा की जाती है जो यूनाइटेड नेशन के कई सोर्सेस के माध्यम से तैयार की जाती है. ग्लोबल हंगर इंडेक्स में पाकिस्तान और नेपाल अब भारत से भी आगे निकल गया है. चलिए जानते हैं कि इस बार भारत को किस पायदान में रखा गया है और इस पर सरकार का तर्क क्या है. 

क्या है भारत की स्थिति?

सहायता कार्यों से जुड़ी आयरलैंड की एजेंसी कंसर्न वर्ल्डवाइड और जर्मनी का संगठन वेल्ट हंगर हिल्फ द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई. GHI 2021 रिपोर्ट के अनुसार भारत 117 देशों में 2020 की 94th रैंक से फिसलकर 101th रैंक पर आ गया है. रैंकिंग के आधार पर भारत की स्थिति को “चिंताजनक” बताया जा रहा है और भारत को “अलार्मिंग” हंगर कैटेगरी में रखा गया है. 

कैसे होती है रैंकिंग ?

GHI स्कोर चार आधारों पर निश्चित किया जाता है जैसे की अल्पपोषण, चाइल्ड वेस्टिंग (पांच साल से कम उम्र के ऐसे बच्चे जिनका वजन लंबाई के हिसाब से कम है), चाइल्ड स्टंटिंग (पांच साल से कम उम्र के ऐसे बच्चे जिनकी उम्र के अनुसार लंबाई कम है) और बाल मृत्यु दर (पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर). रिपोर्ट के अनुसार, भारत में चाइल्ड वेस्टिंग 1998-2002 के बीच 17.1 प्रतिशत थी, जो बढ़कर 2016-2020 के बीच 17.3 प्रतिशत हो गई.

पड़ोसियों से भी पीछे  

इस रैंकिंग के अनुसार भारत अपने पडोसी देशो नेपाल, बांग्लादेश  म्यांमार और पाकिस्तान से भी दयनीय स्थिति में है भारत की 101th रैंक के मुकाबले नेपाल (76), बांग्लादेश (76), म्यांमार (71) और पाकिस्तान (92) रैंक पर है जो की अलार्मिंग केटेगरी में ही है पर भारत की रैंकिंग देखते हुए यह कहा जा सकता है की इन्होने भारत से बेहतर प्रदर्शन किया है.

Cuntry wise data for Global Hunger Index
Cuntry wise data for Global Hunger Index

जहा भारत का रैंक गिरता जा रहा है वही बेलारूस, यूक्रेन, ब्राज़ील, कुवैत जैसे देशो ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर हाईएस्ट रैंकिंग हासिल की है. 

ग्लोबल हंगर इंडेक्स स्कोर में भी गिरावट 

GHI रैंकिंग में ख़राब प्रदर्शन के साथ ही भारत का प्रदर्शन ग्लोबल हंगर इंडेक्स स्कोर में भी ख़राब रहा है. 2000 में भारत का GHI स्कोर 38.8 था. २००5 में 38.9, 2010 में 32 रहा. यह साल 2012-2021 के बीच में गिरकर 28.8 – 27.5 के स्तर पर पहुंच गया है. GHI सीवियरटी स्केल पर 9.9 से कम या बराबर के स्कोर को लो माना जाता है। 10-19.9 के स्कोर को मॉडरेट, 20.0-34.9 को सीरियस, 35.0-49.9 को अलार्मिंग और 50.0 से ज्यादा या बराबर के स्कोर को एक्सट्रीमली अलार्मिंग माना जाता है।

माजूदा परिस्थि और देशो की रैंकिंग को देखते हुए GHI का अनुमान है की विश्व 2030 तक भी भूख की निम्नतम स्थिति को पा नहीं सकेगा। 

ट्विटर पर आलोचना

भारत की रैंकिंग गिरने पर कई राजनीतिक हस्तियों ने भारत की वर्त्तमान सरकार पर निशाना साधते होए ट्विटर पर चुटकी ली है. कपिल सिब्बल के इस ट्वीट से इस बात का अंदाज़ा लगाया जा सकता है की इस रैंकिंग की आलोचना से ट्विटर भरा पड़ा है

सरकार का तर्क 

महिला और बाल विकास मंत्रालय ने GHI रैंकिंग में भारत की स्थिति को चौकाने वाला बताया है. सरकार ने इस रिपोर्ट की आलोचना करते हुए कहा है की यह रिपोर्ट बेहद “अवैज्ञानिक” ढंग से बनाई गयी है. 

सरकार ने दावा किया है की इस रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण मापदंडो को नज़रअंदाज किया गया है जिसके परिणाम स्वरुप भारत की रैंकिंग विश्व भूख स्तर पर गिरी है. सरकार की माने तो रिपोर्ट में प्रस्तुत रैंकिंग के लिए किया गया सर्वे टेलीफोनिक रूप से हुआ था जिसमे वज़न और लम्बाई की मापदंड के आंकड़े में विषमताएं हो सकती है. इस प्रकार के विषम माप दंड रैंकिंग को गिराने के आधार बने हैं.

इसके अतिरिक्त सरकार ने आलोचना में यह भी उल्लेख किया है की पडोसी देशों में बीते वर्षो में हो रहे पेंडेमिक क्राइसिस का कोई बुरा प्रभाव कैसे नहीं पड़ा है और ये कैसे संभव है की वे ग्लोबल हंगर इंडेक्स में अपनी स्थिति सुधारने में समर्थ रहे है. जबकि इन्हीं देशों में इकनोमिक क्राइसिस की बुरी मार पड़ी है. 

वन नेशन मेनी प्रोब्लेम्स

देश की वर्त्तमान स्थिति से उबरने के लिए विशेषज्ञों द्वारा बहुआयामी दृष्टिकोण कृषि पद्धति को अपनाने का सुझाव दिया गया है. इसमें छोटे किसानो को और अधिक अनाज की पैदावार करने, भारत सरकार के प्रयासों से कमजोर वर्ग के लिए पोषाहार की व्यवस्था, सस्ते कैंटीन के प्रोग्राम्स चलाना आदि जैसे कुछ उपाए कारगर हो सकते हैं. 

ग्लोबल हंगर इंडेक्स(GHI) 2019 में 117 देशों में 102 रैंक दर्ज होने पर भूतपूर्व खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री स्वर्गीय रामविलास पासवान ने तात्कालिक “One Nation One Ration Card” को GHI इंडेक्स में भारत की रैंक को बेहतर करने का अचूक उपाय बताया था हालांकि यह स्कीम हाल ही में देश में विभिन्न राज्यों में शुरू कर दी गयी है पर यह बताना मुश्किल है की यह स्किम भारत की हर साल गिरती रैंकिंग को सुधारने में कितना कारगर होगा. 

Author: Team The Rising India

Keywords: Global Hunger Index, GHI Score, One Nation One Ration Card

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