नरसिंहानंद सरस्वती: राम भक्त या नफरत का एक और नाम?

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नरसिंहानंद सरस्वती राम भक्त या नफरत का एक और नाम

दिल्ली, 2020 की फरवरी के अंतिम हफ़्ते में चार दिन तक चली सांप्रदायिक हिंसा ने 53 लोगों की जान ली. हालांकि, मारे गए लोगों में लगभग तीन चौथाई मुसलमान थे और सबसे ज़्यादा आर्थिक हानि मुसलमानों ने झेली, लेकिन, भाजपा नेता और कई कट्टर हिन्दू इस हिंसा को ‘हिंदू विरोधी दंगे’ के रूप में याद करते हैं. दंगा भड़काने और आपसी तनाव बढ़ाने में कई हिन्दू-मुस्लिम के नाम सामने आते हैं. उनमे से हीं एक नाम हैं नरसिंहानंद. नरसिंहानंद सरस्वती: राम भक्त या नफरत का एक और नाम? पढ़ते है पूरी कहानी.

कट्टरपंथी हिंदुत्ववादी भेष में नेता बने नरसिंहानंद की हत्या की धमकी वाला वीडियो पोस्ट करने के आरोप में एक मुस्लिम युवक को गिरफ्तार किया गया है. उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में पुलिस ने पैगंबर मुहम्मद का अपमान करने के लिए नरसिंहानंद के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के बाद 100 से अधिक लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है.

जान से मारने की खुली धमकी पर संज्ञान कब?

आम तौर पर पुलिस ने इन दोनों मामलों में जो किया है, वही करना सही माना जाएगा. यदि कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति को जान से मारने की खुली धमकी देता है, तो उसे गंभीरता से लेने और उसकी धमकी पर कार्रवाई करने की आवश्यकता है. ऐसी स्थिति में गिरफ्तारी एक तरह से अच्छा और सराहनीय कदम है.

नरसिंहानंद ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया और मोहम्मद और इस्लाम के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया. वह भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को ‘जिहादी’ कहते हैं और इस तथ्य पर अफसोस जताते हैं कि विभाजन के समय भारत के मुसलमानों को निष्कासित या नष्ट नहीं किया गया था. नरसिंहानंद ने वास्तव में मुसलमानों की हत्या के लिए कई कॉल किए हैं. उनके कई अनुयायी हैं। उन्होंने मुसलमानों को धमकी देते हुए, हिंदुओं को मुसलमानों से भारत को शुद्ध करने का आह्वान भी किया है.

भड़काऊ बयानबाज़ी से कितना सख्त पुलिस?

दिल्ली पुलिस ने सीएए विरोधी प्रदर्शनों में शामिल कई मुसलमान और प्रगतिशील एक्टिविस्टों को दंगे भड़काने के मामले में गिरफ्तार किया था. लेकिन, दंगे भड़काने की साज़िश की नई कहानी गढ़कर उसके जांच में इस तरह के लीपापोती में योगदान देने वाले लोगों पर भी पुलिस की नज़र बनी हुई है. अपनी जांच के पहले भाग में पुलिस द्वारा जानबूझ कर अनदेखी का भी आरोप खूब लगा. लेकिन, जब मामला उभर कर सामने आई तो लोग उसे टालमटोल करने में जूट गए..

आज हम नरसिंहानंद सरस्वती और उनके सहयोगियों की भूमिका पर बात करें तो, जिनकी भड़काऊ बयानबाज़ी और हिंसक उकसावे ने उन दंगाइयों के मन में उग्रता का बीज बोने में एक अहम योगदान दिया, जिन्होंने फरवरी में हुए जनसंहार में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था. अब लोगों का ये मानना है कि इस दंगों से ठीक पहले मुसलमानों के खिलाफ हिंसा के लिए भड़काना, असली साजिश की एक अनिवार्य कड़ी थी. और इसे खुले में अंजाम दिया गया क्योंकि कट्टरपन्तियों के मन से पुलिस और प्रशासन का ख़ौफ़ नहीं रह गया.

कौन है नरसिंहानंद सरस्वती?

नरसिंहानंद सरस्वती गाजियाबाद के शिव शक्ति धाम डासना मंदिर के महंत है. वह पूर्व बीजेपी सांसद बीएल शर्मा को अपना गुरू मानते हैं. उनको अखिल भारतीय संत परिषद का राष्ट्रीय संयोजक भी बताया जाता है. इसके अलावा उनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने रूस में पढ़ाई की है और मॉस्को व लंदन समेत कई जगहों पर काम भी किया है. वह समाजवादी पार्टी से भी जुड़े रह चुके हैं. वह ‘हिन्दू स्वाभिमान’ नामक संस्था भी चलाते हैं. हिन्दू युवाओं और बच्चों को आत्मरक्षा के प्रशिक्षण के लिए ‘धर्म सेना’ का भी गठन किया है.

नाबालिग बच्चे की पिटाई से चर्चा में आए नरसिंहानंद

यति नरसिंहानंद सरस्वती लगातार अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं, लेकिन, हाल में वह तब चर्चा में दिखे जब डासना के एक मंदिर में कथित तौर पर एक बच्चे की पानी पीने के लिए पिटाई की गई थी. सभी आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा था कि, नाबालिग लड़का मंदिर खराब करने की कोशिश कर रहा था.

उस वक्त नरसिंहानंद सरस्वती ने कहा था कि बाहर से कोई भी शख्स सिर्फ पानी पीने मंदिर के लिए अंदर नहीं घुसेगा. जबकि, बाहर ही नल लगा हुआ है, इसके अलावा सरकारी हैंडपंप भी लगा है. नरसिंहानंद ने यह भी कहा था कि मंदिर के अंदर कई बार चोरी, लूट और छेड़छाड़ की घटनाएं घट चुकी हैं. इसी वजह से हमने मंदिर के बाहर गैर हिंदुओं की एंट्री बैन वाला बोर्ड लगाया है. उनके इस विचार से साफ-साफ नज़र आ रहा है कि ये अपने हिंदुत्व का नकाब डालने वाला पुजारी मंदिर और हिंदुत्व को लेकर कितना एक्टिव है.

नरसिंहानंद सरस्वती के गिरफ्तारी की मांग

इस पूरे मामले में अब राजनीतिक बयानबाजी खूब तुल पकड़ रही हैं. वहीं, खुद को मानवधिकार कार्यकर्ता बताने वाले ओवैसी सुल्तान खान ने नरसिंहानंद सरस्वती के गिरफ्तारी की मांग की है. औरंगाबाद में कांग्रेस के जिला अध्यक्ष ने इस्लाम और पैगंबर के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए नरसिंहानंद सरस्वती के खिलाफ FIR दर्ज कराई है.

नरसिंहानंद सरस्वती: राम भक्त या नफरत का एक और नाम? इस सवाल का जवाब अप्पको खुद से ढूंढना पड़ेगा. एपीजे अब्दुल कलम जैसे महान इंसान को गाली और घृणा देने वाला इंसान राम भक्त हो सकता है या नफरत का एक और नाम!

 

Author: Team The Rising India

Keywords: Dasna Priest, Narsinghanand Saraswati, Delhi Riot 2020, Hatespeech

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