‘मेड इन इंडिया’ एयरक्राफ्ट ‘विक्रांत’ होगा भारतीय नौसेना में शामिल, चीन परेशान!

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'मेड इन इंडिया' एयरक्राफ्ट ‘विक्रांत’ होगा भारतीय नौसेना में शामिल, चीन परेशान!

‘मेड इन इंडिया’ एयरक्राफ्ट ‘विक्रांत’ होगा भारतीय नौसेना में शामिल, चीन परेशान! भारत के पहले स्वदेशी रूप से डिजाइन विमानवाहक जहाज ‘विक्रांत’ ने पांच दिवसीय अपनी पहली समुद्री यात्रा रविवार को सफलतापूर्वक पूरी कर ली. भारतीय नौसेना ने इसे देश के लिए ‘‘गौरवान्वित करने वाला और ऐतिहासिक’’ दिन बताया. भारत उन चुनिंदा देशों में शुमार हो गया है जिनके पास विशिष्ट क्षमता वाला स्वदेशी रूप से डिजाइन, निर्मित और एकीकृत अत्याधुनिक विमानवाहक पोत है.

इस 40,000 टन वजनी युद्धपोत की प्रमुख प्रणालियों का प्रदर्शन सफल रहा. आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के तहत तैयार हुए देश के पहले विमानवाहक युद्धपोत ‘विक्रांत’ का समुद्री परीक्षण शुरू हो गया है. हालांकि, जुलाई में इसके तटीय परीक्षण सफल रहा था. जिसके बाद से उम्मीद लगाया जा रहा है कि परीक्षण सफल ही रहे.

INS Vikrant begins Sea Trial, china worried
INS Vikrant begins Sea Trial

इस विमानवाहक जहाज को अगले साल तक भारतीय नौसेना में शामिल किए जाने की संभावना है. भारतीय नौसेना के प्रवक्ता कमांडर विवेक मधवाल का कहना है कि, ‘यह भारत के लिए गौरवान्वित करने वाला और ऐतिहासिक दिन है.

1971 के युद्ध में जीत में अहम भूमिका निभाने वाले विक्रांत अपने 50वें साल में आज यह समुद्र में परीक्षण के लिए पहली बार रवाना हुआ.’ उन्होंने कहा कि यह भारत में बना सबसे बड़ा और जटिल युद्धपोत है. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि, आत्मनिर्भर भारत और ‘मेक इन इंडिया’ पहल में यह एक गौरवान्वित करने वाला और ऐतिहासिक क्षण है. 

आईएनएस विक्रांत के नाम पर किया

पहले स्वदेशी युद्धपोत ‘विक्रांत’ का नामकरण आईएनएस विक्रांत पर किया गया है. ये वही नाम है जिसने 1971 की जंग में कमाल दिखाया था. जिसने बंगाल की खाड़ी से पाकिस्तानियों पर कहर बरपाया था. जिसकी मौजूदगी ने पूर्वी पाकिस्तान की जंगी शिकस्त की कहानी लिखी, अब रिटायर हो चुका है. नए स्वदेशी युद्धपोत का नाम ‘आईएसी पी 71 ‘विक्रांत’ रखा गया है. बता दें कि भारत के समंदर में धीरे धीरे ये आगे बढ़ता स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत है. इंडियन नेवी की वो ताकत, जो समंदर की जिसकी मौजूदगी से ही सेना का मनोबल आसमान छूने लगता है.

क्या है आईएनएस विक्रांत ?

भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक युद्धपोत 40 हजार टन का है. ‘मेड इन इंडिया’ एयरक्राफ्ट ‘विक्रांत’ जल्द होगा भारतीय नौसेना में शामिल. इस पोत का नाम आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant) है. इस साल नौसेना अलग-अलग तरह के परीक्षण करेगी ताकि, ताकत और मजबूती का अनुमान लगाया जा सके.

INS विक्रांत (INS Vikrant) में इलेक्ट्रिक के ताकतवर टरबाइन लगे हैं. जो इसे 1.10 लाख हॉर्सपावर की ताकत देते हैं. इस पर MiG-29K लड़ाकू विमान, 10 Kmaov Ka-31 और MH-60R मल्टीरोल हेलिकॉप्टर्स स्क्वॉड्रन तैनात होंगे. इस विमानवाहक पोत की स्ट्राइक फोर्स की रेंज 1500 किलोमीटर है. इसपर 64 बराक मिसाइलें लगी होंगी. जो जमीन से हवा में मार करने में सक्षम हैं.

कितने की लागत से बनी है ये युद्पोत?

भारत का ये स्वदेशी विमानवाहक युद्धपोत की लागत करीब 23 हजार करोड़ रुपये है. यह 262 मीटर लंबा और 62 मीटर चौड़ा भी है. इसका निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने किया है. बता दें कि इसकी स्पीड 52 किलोमीटर प्रति घंटा है. इसमें 14 फ्लोर मौजूद हैं. इस पर लगभग 1700 नौ सैनिक तैनात किए जा सकते हैं. 30 लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर तैनात कर सकते हैं.

इसका निर्माण करने में 50 से ज्यादा भारतीय कंपनियों ने अपना अहम योगदान दिया है. इसमें करीब 40 हजार लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिला. और महिला नौ सैनिकों के लिए इसमें खास व्यवस्था भी की गई है. इसमें महिला नौ सैनिकों को भी तैनात किया जा सकता है. यह एक बार में 7500 समुद्री मील की दूरी तय कर सकता है जो भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है.

आईएनएस का समुद्री इतिहास समृद्ध और गौरवपूर्ण

‘मेड इन इंडिया’ एयरक्राफ्ट ‘विक्रांत’ होगा भारतीय नौसेना में शामिल, चीन परेशान! भारत के इतिहास में समुद्री इतिहास काफी समृद्ध है और गौरव से भरा है. देश के समुद्री और सैन्य इतिहास का गौरव बढ़ाने में नौसेना के पोतों का अहम योगदान रहा है. जब भारतीय नौसेना के जहाजों के योगदान को याद किया जाता है तो उनमें एक नाम आईएनएस (इंडियन नेवल शिप) विक्रांत का नाम शीर्ष पर आता है.

जी हां, साल 1961 में इस विमानवाहक जहाज को आईएनएस विजयलक्ष्मी पंडित के नाम से सेवा में शामिल किया गया है. बाद में इसका नाम विक्रांत किया गया जिसका संस्कृत में मतलब अपराजेय और साहसी होता है.

Rajnath Singh at INS Vikrant Carrier trial
Rajnath Singh at INS Vikrant Carrier trial

इस जहाज का निर्माण ब्रिटेन के विकर्स-आर्मस्ट्रॉन्ग शिपयार्ड पर हुआ था. शुरू में इसका नाम एचएमएस (हर मजेस्टी शिप) हर्कुलस था. यह ब्रिटेन के मजेस्टिक क्लास का पोत था. जिसे साल 1945 में ब्रिटिश नौसेना की सेवा में शामिल किया गया. जहाज को सक्रिय सैन्य अभियान में तैनात किया जाता है. उससे पहले ही दूसरा विश्वयुद्ध समाप्त हो गया. उसके बाद नौसेना की सक्रिय ड्यूटी से इस जहाज को हटा दिया गया. और फिर साल 1957 में भारतीय नौसेना को बेच दिया गया.

 

Author: Team The Rising India

Keywords: INS Vikrant, Made in India aircraft Vikrant, Indian Army

1 COMMENT

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