पेपर और यू ट्यूब से पढ़ बने 22 वर्ष में SDM, नहीं थे ट्यूशन के पैसे!

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पेपर और यू ट्यूब से पढ़ बने 22 वर्ष में SDM, नहीं थे ट्यूशन के पैसे!

“लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।” सोहन लाल द्विवेदी जी की ये प्रसिद्ध पंक्तियाँ आज के लेख के मुख्य नायक नसीन मंजू निशांत जी के लिए बिल्कुल युक्त है. आपमें से कुछ लोगों को यह नाम कुछ नया लग रहा होगा। हालांकि यह नाम काफी मशहूर है. जानते है की नसीन मंजू निशांत कौन हैं और क्यूँ चर्चा में हैं? [Success story of Bihar youngest SDM Nasim Manju Nishant]

22 वर्ष के SDM

Nasin Manju Nishant
Nasin Manju Nishant ( Pic – Fb )

जी हां, केवल 22 वर्ष की आयु में ही निशांत ने अपने कठिन परिश्रम से SDM (SUB DIVISIONAL MAGISTRATE ) बनकर यह साबित कर दिया है की जहा चाह है वहाँ राह भी है. पिछले दिनों निशांत की बिहार के मधुबनी में SDM के रूप में नियुक्ति हुई है. इस ख़ुशी को उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी व्यक्त किया.  [Success story of Bihar youngest SDM Nasim Manju Nishant]

निशांत का बचपन 

13 अप्रैल 1996 को निशांत का जन्म हुआ. निशांत का बचपन बिहार में  सीतामढ़ी जिले के बासोपट्टी नामके एक छोटे से गाँव में बीता। निशांत ने छठी से दसवीं तक की पढ़ाई डीएवी स्कूल पुपरी सीतामढ़ी से की।  फिर दरभंगा के स्कूल में 12वीं कक्षा में दाखिल लिया। नसीन दसवीं में टॉपर रहे थे। चार भाइयो में सबसे छोटे निशांत बचपन से ही प्रतिभावान है.

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12वी की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद निशांत ने NIT में भी सिलेक्शन हासिल किया पर वे आईआईटी से माइनिंग इंजीनियर की डिग्री हासिल करना चाहते थे. अपने माइनिंग इंजीनियर का सपना पूरा करने के लिए उन्होंने कोटा में कोचिंग भी की. [Success story of Bihar youngest SDM Nasim Manju Nishant]

पढाई के लिए पैरो पर 

निशांत ने वह समय भी स्मृत किया जब उन्हें कोचिंग संचालक के पैर पकड़ने पड़े थे. यह तब की बात है जब निशांत के कोचिंग के 76 हज़ार फीज़ के जगह उनके पास लगभग आधे पैसे थे. उन्होंने अपने संचालक को IIT परीक्षा पास करने में खुद को सक्षम होने का भरोसा दिलाया था.

Nasin Nishant with Khan Sir
Nasin Nishant with Khan Sir

उनकी इच्छा सकती देख कर कोचिंग संचालको ने उन्हें कम फीस के साथ ही प्रवेश लेने के लिए एक शर्त रक्खी। इस शर्त के अनुसार अगर वो कोचिंग द्वारा लिए जानी मासिक परीक्षा में 200 या अधिक अंक लाना होगा. निशांत जैसे होनहार छात्र को सोचते हुए इसमें कोई अचम्भा नहीं है की उन्होंने उस शर्त को 211 अंक लाकर जीत लिया और आगे की पढाई शुरू की. फिर आईआईटी बीएचयू से इंजीनियरिंग की. इसी बीच मां का फरवरी 2017 में निधन हो गया. लेकिन निशांत ने हार नहीं मानी.

टाटा में भी हुआ सेलेक्शन: 

2018 में ही टाटा स्टील में उसका सेलेक्शन हो गया था, लेकिन उसने उसे ठुकरा दिया और सिविल सर्विसेज की परीक्षा में लग गया। उसने यह सफलता प्रथम प्रयास में ही हासिल की है। अपने पिता और भाइयों के संरक्षण, पुपरी और पैतृक गांव ददरी पंचायत के बासोपट्टी में रहकर ही उसने परीक्षा की तैयारी की थी। [Success story of Bihar youngest SDM Nasim Manju Nishant]

Success story of Bihar youngest SDM Nasim Manju Nishant
Nashin Nishant after becoming SDM

निशांत का कहना है कि अगर परिवार का माहौल सहयोगात्मक हो. अभिभावक बच्चे की भावनाओं का ख्याल रखते हुए उसे सतत सहयोग करते रहें तो निश्चित तौर पर परीक्षा की तैयारी के लिए घर में अच्छा माहौल बनता है। इसके अलावा उन्होंने पेपर, पत्रिका और यू ट्यूब से बहुत मदद ली। उनका कहना है कोई भी युवा ऐसे माहौल में घर पर रहकर अपनी तैयारी करके सफलता अर्जित कर सकता है।

शायरी का शौख:

पढाई में अत्यधिक होनहार होने के साथ निशांत को शायरी का भी शौख है. उन्होंने अपने सोशल मीडिया एकाउंट्स पर कई बार अपने विचार शायरियों के माध्यम से व्यक्त किये है. पिछले दिनों दिवाली के अवसर पर निशांत ने अपने सोशल मीडिया पर कुछ इस तरह लोगो को दिवाली की शुभकामनाये दी.

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