क्या 84 करोड़ के झंडों से आएगी दिल्ली में ‘देशभक्ति’?

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क्या 84 करोड़ के झंडों से आएगी दिल्ली में 'देशभक्ति'

भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के सानिध्य में गुजरात में स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी के बनाये जाने के निर्णय के बाद से ही इसकी आलोचना होती रही है. कुछ सालो बाद फिर से उसी तरह की एक घटना ने आलोचकों को मसाला दे दिया है. इस बार इनका निशाना आम आदमी पार्टी के फाउंडर और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल हैं. क्या 84 करोड़ के झंडों से आएगी दिल्ली में ‘देशभक्ति’? पढ़ते है विस्तार में.

सुर्खियों में क्यों?

मुख्यमंत्री केजरीवाल ने मार्च में अपना सालाना बजट पेश किया जिसे “देशभक्ति” बजट का नाम दिया गया. 69000 करोड़ के इस टोटल बजट में सबसे ज्यादा पैसे शिक्षा और हेल्थ को ध्यान में रखकर आवंटित किए गए. इसी श्रृंखला में 45 करोड़ रुपये खर्च कर दिल्ली के लोगों में ‘देश भक्ति’ कि भावना जगाने और सच्ची देश भक्ति सिखाने के मकसद से आवंटित किया गया. तो क्या 84 करोड़ के झंडों से आएगी दिल्ली में ‘देशभक्ति’ या महज राजनीतिक विषय बनकर रह जाएगी?

गली गली में तिरंगा

इस साल हमारा देश आज़ादी के 75 साल पूरे करने जा रहा है. दिल्ली सरकार के हिसाब से दिल्ली के गली-गली में तिरंगा लहराना इस महान पर्व के उत्साह को बढ़ाने और देशप्रेम दिखाने का एक अलग तरीका होगा. 2021-22 के अपने बजट में किये 45 करोड़ रुपयों का आवंटन दिल्ली प्रदेश सरकार ने अब बढ़ा कर 84 करोड़ कर दिया है. दिल्ली सरकार की माने तो पैसे कि बढ़ोतरी PWD के टेंडर में परिवर्तन के बाद किया गया है.

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इस योजना के अनुसार दिल्ली शहर के 500 अलग अलग जगहों पर झंडो की स्थापना की जाएगी. दिल्ली के डिप्टी चीफ मिनिस्टर मनीष सिसोदिया ने कहा, ”अगर कोई अपने घर से 2 किमी बाहर भी जा रहा है, तो उसे तिरंगा अपनी सारी महिमा में उड़ता हुआ देखने को मिलेगा और देशभक्ति का अनुभव होगा.”

कहाँ होगी स्थापना?

दिल्ली के कनॉट प्लेस में स्थापित तिरंगा कई किलोमीटर्स दूर से भी देखा जा सकता है. कुछ लोगो को झंडे को देख कर ही सही पर देश भक्ति का अहसास थोड़े समय के लिए हो ही जाता होगा. इसी बात को ध्यान में रख कर शायद दिल्ली सरकार ने ये प्रोग्राम चलाया है.

500 में से 5 तिरंगे नई दिल्ली, पटपरगंज, कालकाजी, द्वारका और शकूरबस्ती विधानसभा क्षेत्र में लगाए जाने है. सूत्रों के मुताबिक PWD सार्वजनिक जगहों पर सर्वे करा रही है ताकि अन्य 495 तिरंगे की स्थापना कि जा सके. आवंटित टेंडर के हिसाब से हर एक झंडे की लागत लगभग 16 लाख की होगी. हर झंडों की ऊंचाई लगभग 35 मीटर होगी.

आलोचना क्यू?

बीते एक वर्ष में दिल्ली में कोरोना विस्फोट से हुई तबाही को शायद ही कोई भूला होगा. सुविधा के अभाव में अपने परिजनों को न बचा पाने के दुःख में लोग सड़को पर अपना आपा खो रहे थे. लोग दिन-दिन भर बिना अनाज पानी के भटकटे, रोते, बिलबिलाते दिख रहे थे. ऑक्सीजन की कमी ने तो भूचाल ही मचा रखा था हालाँकि स्थिति अभी भी पूरी तरह काबू में नहीं की जा सकी है.

जब आलम यह है की हमारा हेल्थ सेक्टर ध्वस्त पड़ा है और दिल्ली में प्रदुषण, पानी, सब्सिडी राशन जैसे कई अन्य संकट है जिनका अतिशीघ्र निवारण करना बहुत जरुरी है. तब ऐसे वक्त में देश भक्ति का यह तरीका लोगो की समझ से परे लगता है. हालाँकि, बीते वर्षों में दिल्ली सरकार ने हेल्थ और शिक्षा में सराहनीय काम किया है फिर भी अभी और मेहनत कि ज़रूरत है.

आंकड़े क्या कहते है?

Scroll.in की एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले बजट में दिल्ली सरकार ने मोहल्ला क्लीनिक के लिए केवल 70 करोड़ रुपये ही खर्च किये तो वही दिल्ली कमिशन ऑफ़ वीमेन को महज़ 40 करोड़ रुपये आबंटित किये थे. इसी तरह ST/SC/OBC के स्कोलरशिप रेम्बेरस्मेंट के लिए केवल 48 करोड़ का आबंटन हुआ था. जाहिर है 500 झंडे लगाने के लिए 84 करोड़ रुपयों के आबंटन विरोधियों की आँखों का कांटा बना हुआ है. 

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तिरंगे को लहराता हुआ देख कर तो हर भारतीय गद-गद हो ही उठता है पर हमारे देश में वर्त्तमान में चल रहे आर्थिक संकट, हेल्थ सेक्टर में अति आवश्यक चीज़ो की कमी, लोगो की रोज़ाना की ज़िन्दगी का तीतर-बितर हो जाना, ये सब देखने के बाद यह जरुर कह सकते है कि 84 करोड़ की जरुरत झंडों से ज्यादा कहीं और है. पर ऐसा लगता है कि पोलिटिकल एजेंडा भी अपने आप में एक जरूरत बन गई है. 

 

Author: Team The Rising India 

Keywords: 84 crores for Indian Flag, AAP, BJP, Arvind Kejriwal 

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