‘बातों में महारत, काम में नदारद’ मोदी सरकार? 2019 से तीन गुना ज्यादा पैसा स्वीस बैंक में …

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Feature Image swiss bank funds increased
India's money in Swiss bank increased by 20700cr

पिछली सरकारों में स्विस बैंक का जिक्र आपने खूब सुना होगा. लेकिन एक बार फिर स्विस बैंक खबरों में आ गया है. दरअसल, 2014 में लोक सभा चुनाव के दौरान यह मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चा में रहा और अब स्वीस बैंक में 20700 करोड़ तक पहुच गया है.

तमाम चुनावी दावे किए गए हैं कि स्विस बैंक में जमा काला धान वापस भारत लाया जाएगा. लेकिन काले धन को वापस लाना तो दूर बल्कि इसमें अब रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है. पिछले 13 साल में स्विस बैंक में जमा पैसा रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा गया है.

स्वीस बैंक में 20700 करोड़

एक रिपोर्ट के अनुसार स्वीस बैंक में 20,700 करोड़ की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है.. जो कि पिछले 13 साल की तुलना में सबसे अधिक है. वर्ष 2019 में स्विस बैंक फ्रांस में तकरीबन 6, 625 करोड़ रुपये जमा थे. लेकिन अब यह राशि 2019 से तीन गुना ज्यादा तक पहुंच गया है.

2006 में स्विस बैंक में भारतीयों का पैसा सबसे ज्यादा जमा था. हालांकि इसके बाद से लगातार जमा पैसा में कमी देखने को मिली थी. वर्ष 2011, 2013 और 2017 में स्विस खातों में भारतीयों का पैसा बढ़ा था जबकि बाकि के सालों में इसमें गिरावट देखने को मिली थी. लेकिन अब इसमें जबरदस्त बढ़ोतरी सामने आई है.

मोदी सरकार ने काले धन को ले कर हमेशा से कहती आई है कि वो लगाम लगाएगी मगर आकरें कुछ और ही बयां कर रहे है. हालांकि, केंद्र सरकार ने स्वीस बैंक में 20700 करोड़ के सभी खबरों को सिरे से नकार दिया. और कहा है, कि स्वीटजर्लैंड के अधिकारियों ने इस सभी खबरो की सत्यता से साफ इंकार कर दिया है.

बातों में महारत, काम में नदारद’ मोदी सरकार?

कांग्रेस पार्टी के पार्टी प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने दावा किया है कि ‘‘यह एक और बड़ा खुलासा है, ‘बैंक फॉर इंटरनेशनल सैटेलमेंट’ (बीआईएस) ने स्विस बैंक में विभिन्न नागरिकों द्वारा जमा किए गए धन राशि, भारतीय नागरिकों द्वारा स्विस बैंक में जमा की गई धनराशि 2019 की तुलना में 2020 में 39 प्रतिशत बढ़ी.  

‘बातों में महारत, काम में नदारद’ मोदी सरकार?स्वीस बैंक में 20,700 करोड़ की रिकॉर्ड बढ़ोतरी? 2019 से अब तीन गुना ज्यादा… Click To Tweet

उनके मुताबिक, 2014 में सत्ता में आने से पहले, भाजपा ने दावा किया था कि भारतीयों ने 250 अरब डॉलर (17.5 लाख करोड़ रु.) अकेले स्विट्जरलैंड के बैंकों में छिपाया हुआ है. भाजपा ने यह वादा भी किया कि विदेशी बैंकों में छिपाए गए इस काले धन को वापस लाया जाएगा और हर भारतीय को उसके खाते में 15 लाख रुपये मिलेंगे. पिछले 7 सालों में, मोदी सरकार ‘बातों में महारत, काम में नदारद’ सरकार बन गई.

ये आरोप है कांग्रेस की खेमे से, लेकिन सवाल ये भी है कि जब-जब कोई भी पार्टी सत्ता में आई तब-तब ज़िक्र छिड़ा स्विस बैंक को लेकर लेकिन सरकार नकाम क्यों. सवाल ये भी, कि विदेशों में जमा धन राशि में इस तरह की बढ़ोतरी कैसे हो रही है. क्या मोदी सरकार इस पर कोई एक्शन लेगी या फिर दावें की दावें ही रहेंगे… 

पैसा जमा कैसे होता है, क्या है नियम?

18 साल से अधिक उम्र का कोई भी व्यक्ति स्विस बैंक में खाता खोल सकता है. बैंक किसी प्रकार के गैर-कानूनी पैसा या कोई गलत मकसद से हो, तो वो आवेदन खारिज कर सकता है. स्विट्जरलैंड में लगभग 400 बैंक हैं, जिनमें यूबीएस और क्रेडिस सुइस ग्रुप सबसे बड़े हैं. इन दोनों के पास सभी बैंकों की बैलेंस शीट का आधे से ज्यादा बड़ा हिस्सा है.

जिन खातों को यहां गोपनीय रखा जाता है उन्हें ‘नंबर्ड अकाउंट’ कहते हैं. इस खाते से जुड़ी सारी बातें बिना किसी का नाम लिए केवल अकाउंट नंबर के आधार पर होती हैं. बैंक खता कि जानकारी महज चुनिंदा लोगों को होता है. माना जाता है कि पकडे जाने के डर से, बहुत से खाताधारक बैंक के क्रेडिट या डेबिट कार्ड या चेक सुविधा नहीं लेते हैं.

भारत और पड़ोसी देश स्विस बैंकों में पैसा जमा कराने के मामले में बाकी कई देशो से पीछे हैं. इस सूची में पाकिस्तान 82, बांग्लादेश 89, नेपाल 109, श्रीलंका 141, म्यांमार 187 और भूटान 193वें नंबर पर है.

1996 से 2007 तक भारत टॉप 50 देशों में शामिल था. 2007 के बाद भारत की रैंकिंग में गिरावट आनी शुरू हुई. वहीं, 2018 में भारतीयों की जमा रकम में 6 फीसदी की कमी देखी गई. तब यह करीब 6757 करोड़ रुपये थी. लेकिन अब भारत में भी इसकी रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई जिससे मौजूदा सरकार सवालों की घेरे में है.

ब्लैक मनी का गढ़ क्यों बनता है स्विस बैंक ?

स्विट्जरलैंड में जितने भी बैंक हैं उन्हें स्विस बैंक कहा जाता है. स्विट्जरलैंड टैक्स हैवन के नाम से जाना जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि आप यहां जितना भी पैसा जमा कर लें आपको मामूली कर के रूप में भगुतान करना होता है.

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साथ ही हर देश की तरह स्विट्जरलैंड में भी बैंक सीक्रेसी लॉ (गोपनीयता कानून) लागू होता है. लेकिन, यहां पर कानून थोड़ा अलग है. स्विस बैंकिंग एक्ट (1934) के तहत बैंक अपने खाताधारकों की जानकारी उनकी अनुमति के बिना सार्वजनिक नहीं करता है.

इतना ही नहीं अगर खाताधारक अपने देश में वित्तीय अनियमितता में लिप्त है और स्विट्जरलैंड में उस पर ऐसा कोई मामला नहीं है तो पुलिस से लेकर अदालत तक, बैंक से उसके ग्राहक के बारे में कोई जानकारी नहीं मांग सकता हैं. स्विस बैंककर्मी किसी खाते की जानकारी लीक करता है तो उसे छह महीने की कैद के अलावा 50,000 फ्रैंक्स तक का जुर्माना हो सकता है.

केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने शनिवार, 19 जून को कहा कि स्विस बैंकों में भारतीयों की जमा राशि में वृद्धि भारत में स्थित स्विस बैंक शाखाओं के कारोबार में वृद्धि और अंतर-बैंक लेनदेन में वृद्धि के कारण हो सकती है. भारत सरकार ने स्विस अधिकारियों से अनुरोध किया गया है कि वे जमा में वृद्धि या कमी के संभावित कारणों पर अपने विचार के साथ प्रासंगिक तथ्य प्रदान करें ताकि तथ्यों को सही परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया जा सके.

Author : The Rising India Team

Keywords : Black Money 2021, Swiss Bank, Black money increased by 20700 crores, Congress, Modi Government

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