जब ‘सूअर’ बना अमेरिका और ब्रिटेन के बीच युद्ध का कारण!

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जब 'सूअर' बना अमेरिका और ब्रिटेन के बीच युद्ध का कारण!

एक पुरानी कहावत है कि “युद्ध के मुख्य रूप से तीन कारण होते हैं: ज़ार, जोरू और ज़मीन”. अगर आप पीछे मुड़कर पूरी दुनिया के इतिहास पर नजर डालें, तो इस इतिहास में अनगिनत युद्धों का इतिहास मिलेगा. कभी भूमि युद्ध लड़े जाते थे तो कभी युद्ध अपना वर्चस्व साबित करने के लिए लड़े जाते थे. जब ‘सूअर’ बना अमेरिका और ब्रिटेन के बीच युद्ध का कारण!

लेकिन एक युद्ध में ऐसी स्थिति सामने आई, जहाँ युद्ध का कारण एक “सूअर” बना. अमेरिका और ब्रिटेन की सेना आमने-सामने खड़ी हो गई. एक सूअर के कारण दोनों देशों किसेना एक दूसरेको दुश्मन मान बैठी थी.

ऐसे में इतिहास के पन्नों में दबी इस कहानी को जानना दिलचस्प होगा. चलिए हम जानते हैं कि कैसे “सुअर” बना अमेरिका और ब्रिटेन के बीच युद्ध का कारण.

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[जब ‘सूअर’ बना अमेरिका और ब्रिटेन के बीच युद्ध का कारण!][The Pig War of 1859]

‘ओरेगन संधि’ और द्वीप का विभाजन

‘द पिग वॉर’ (The Pig War of 1859) को इतिहास के सबसे अजीब और काले युद्धों में से एक माना जाता है. सुअर के लिए शुरू हुए इस युद्ध के खत्म होने की कहानी साल 1846 में शुरू हुई थी. जब इसी साल अमेरिका और ग्रेट ब्रिटेन के बीच एक संधि हुई जिसका नाम ‘ओरेगॉन संधि’ था. इस संधि के तहत रॉकी पर्वत और प्रशांत तट को लेकर अमेरिका, ग्रेट ब्रिटेन और उत्तरी अमेरिका (जो बाद में कनाडा बन गया) के बीच विवाद हुआ था.

Map of San Juan - Pigwar
Map of San Juan – Pigwar

इस संधि से कुछ समय से चला आ रहा विवाद समाप्त हो गया. इस संधि के अनुसार इन देशों के बीच की सीमा को 49 समानांतर रेखाओं से विभाजित किया गया था. यह सीमा आज भी इन देशों की सीमाओं को विभाजित करती है. [जब ‘सूअर’ बना अमेरिका और ब्रिटेन के बीच युद्ध का कारण!][The Pig War of 1859]

विभाजन के बाद ( The Pig War )

अगले कुछ वर्षों तक सब कुछ ठीक रहा और संयुक्त राज्य अमेरिका और ग्रेट ब्रिटेन के लोग यहां आकर बसने लगे थे. वर्ष 1859 तक, ग्रेट ब्रिटेन के नागरिक अधिक मजबूती से या संख्या में बसने लगे. हडसन की ‘बे कंपनी’ के भी यहाँ बसने से ब्रिटेन को और भी ताकत मिली. कंपनी ने अपनी सुविधा के साथ द्वीप पर भेड़ फार्म भी बनाया.

उसी समय की रिपोर्ट के अनुसार, द्वीपवासियों में अच्छा मेल-जोल था और अच्छे से रहते थे. ब्रिटिश कोलंबिया के गवर्नर जेम्स डगलस द्वीप पर ब्रिटिश आधिपत्य बनाए रखने के लिए सैन जुआन द्वीप पर तैनात थे. ब्रिटिश नियंत्रण के अधीन हारो जलडमरूमध्य से सटे वैंकूवर द्वीप का अपने प्राकृतिक संसाधनों, जल और जलीय जीवन पर नियंत्रण था. ऐसे में दूसरी तरफ अमेरिकी बसने वालों को दिक्कत हो सकती थी.

सूअर को गोली मारने से खड़ा हुआ विवाद

इन सबके बीच 15 जून, 1859 को एक ब्रिटिश सूअर अमेरिकी किसान ‘लाइमैन कटलर’ के खेतों में घूमा. कटलर ने जब अपने खेत में सुअर को आलू खाते हुए देखा तो वह आगबबूला हो गया. उसे देखकर कटलर ने गुस्से में सूअर को गोली मार दी जिससे सुअर की मौत हो गई. मरते हुए सुअर के मालिक हडसन कंपनी के कर्मचारी ‘चार्ल्स ग्रिफिन’ था. चार्ल्स के पास पालतू जानवर के रूप में कई सूअर थे.

US and UK fought over a dead Pig in 1859
US and UK fought over a dead Pig in 1859

वह वहां अपने पालतू जानवरों को द्वीप पर खुलेआम चरने के लिए भी प्रसिद्ध था. बता दें, यह पहली बार नहीं था जब कटलर के खेत में इस तरह का सूअर घुसा था. सूअर का मालिक कटलर पर चिल्लाना शुरू कर देता है. कटलर कहते हैं कि वह “मेरे आलू खा रहा था”, जिस पर ग्रिफिन जवाब देता है, “यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप अपने खेत को मेरे सूअरों से दूर रखें.”

कटलर ने स्थिति को बिगड़ते देखा और यहां तक ​​कि अपने सुअर की मौत के लिए मुआवजे में दस डॉलर का भुगतान करने की पेशकश की। लेकिन, उन्होंने साफ मना कर दिया. बल्कि ग्रिफिन ने स्थानीय ब्रिटिश अधिकारी से शिकायत की, जिसने कटलर को गिरफ्तार करने की धमकी भी दी. जब ‘सूअर’ बना अमेरिका और ब्रिटेन के बीच युद्ध का कारण!

[जब ‘सूअर’ बना अमेरिका और ब्रिटेन के बीच युद्ध का कारण!][The Pig War of 1859]

फिर अमेरिका भी कूद पड़ा मैदान में

इसके बाद अमेरिकी लोगों ने कटलर के लिए अमेरिकी सेना से भी मदद मांगी और उनका अनुरोध जनरल विलियम एस. हार्नी ने सुना. वह उस समय अंग्रेजों से नफरत के लिए जाने जाते थे. इसलिए बिना देर किए उसने 27 जुलाई, 1859 को अपनी सेना सैन जुआन भेज दी. जब ब्रिटिश गवर्नर जेम्स को इस बात का पता चला तो उन्होंने अपनी सेना की तीन यूनिट भी वहां भेज दीं.

जब 'सूअर' बना अमेरिका और ब्रिटेन के बीच युद्ध का कारण!
Article on San Juan Islander in 1859

अब दोनों सेनाएं आमने-सामने थीं. कई महीनों तक दोनों सेनाओं का आमना-सामना हुआ. धीरे-धीरे दोनों खेमों में सेनाओं की संख्या भी बढ़ने लगी. बात इतनी बढ़ी कि ब्रिटिश नौसेना के कमांडर-इन-चीफ रॉबर्ट एल. बायन्स भी घटनास्थल पर पहुँच गए. जब वे वहां पहुंचे तो जेम्स डगलस ने बाइन्स को वहां अमेरिकी सेना पर हमला करने का आदेश दिया. लेकिन बायन्स ने ऐसा करने से इनकार कर दिया. वह नहीं चाहता था कि दो बड़े देश एक सुअर के लिए लड़ें.

दोनों पक्षों का फैसला

आखिरकार मामले की गंभीरता की खबर ब्रिटिश और अमेरिकी सरकारों तक पहुंच गई. एक सुअर को लेकर इतना बड़ा विवाद खड़ा होने की बात सुनकर अधिकारी बहुत हैरान हुए. जिसमें 3 युद्धपोत, 84 बंदूकें और लगभग 26 सौ सैनिक तैनात थे। इसलिए इस मूर्खतापूर्ण घटना को जल्द से जल्द खत्म करने के लिए दोनों पक्षों के देशों ने बातचीत शुरू कर दी है. 

दोनों पक्षों ने फैसला किया है कि द्वीप पर 100 से अधिक लोग नहीं होने चाहिए. इसी तरह, अंग्रेजों ने उत्तरी द्वीप पर और दक्षिण की ओर अमेरिकियों ने अपने शिविर स्थापित किए. यह स्थिति 1872 तक बनी रही. उसी वर्ष, जर्मनी के कैसर विल्हेम प्रथम के अंतर्राष्ट्रीय आयोग ने इस द्वीप का पूरा नियंत्रण अमेरिका को सौंप दिया। और इसके साथ ही इस आइलैंड से जुड़े सारे विवाद खत्म हो गए.

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आज भी सैन जुआन द्वीप में तब बसे हुए कैंप मौजूद हैं. यह नेशनल हिस्टोरिकल पार्क में बदल दिया गया है. यहाँ हर साल इसे देखने के लिए विश्व भर से सैलानी आते हैं. यह थी कहानी जब ‘सूअर’ बना अमेरिका और ब्रिटेन के बीच युद्ध का कारण! 

Author: Team The Rising India

[जब ‘सूअर’ बना अमेरिका और ब्रिटेन के बीच युद्ध का कारण!][The Pig War of 1859]

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